उत्तराखंड

तो क्या अब निकाय चुनाव का मतदाता पंचायत मतदाता सूची में नाम होने पर वोट डालेंगे ?

निकाय मतदाताओं के पंचायत चुनाव में प्रत्याशी बनने पर ग्रामीणों में आक्रोश

पौड़ी । राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि प्रदेशिक पंचायत निर्वाचक नामावलियों में नाम दर्ज  होने पर कोई भी मतदाता अब पंचायतों में विभिन पदों हेतु दावेदारी कर सकेंगे । राज्य निर्वाचन आयोग के इस आदेश पर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों में इस बात पर आक्रोश दिखाई दे रहा है कि यदि मतदाता निकाय चुनाव में भाग ले चुका है तो वह पंचायत चुनाव में कैसे वोट दे सकता है। इधर, लोग इस बात पर नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं कि आयोग का स्पष्टीकरण पत्र तब जारी हो रहा है जबकि पंचायती चुनावों में नामांकन पत्रों की जांच प्रक्रिया भी लगभग पूरी हो गयी थी।निकाय व पंचायत दोनों जगह निर्वाचक नामावलियों में नाम दर्ज होने और ऐसे लोगों की पंचायत चुनाव में दावेदारी के मुद्दे पर राज्य निर्वाचन आयोग की कभी ‘हाँ ‘ और कभी ‘ना’ से लोगों में भ्रान्तियां पैदा हुई हैं। इन्हे दूर करने के लिये आयोग को दो हफ्तों में यह तीसरा आदेश जारी करना पड़ा है।

नए आदेश में कहा गया है कि उत्तराखंड में पंचायत चुनाव पूर्ण रूप से उत्तराखण्ड पंचायतीराज अधिनियम, 2016 (यथासंशोधित) के प्रावधानों के अनुसार ही संपन्न कराए जाते हैं।

इस आदेश में कहा गया है कि विशेष रूप से, यह गलत प्रचार किया जा रहा है कि यदि किसी उम्मीदवार का नाम शहरी और ग्रामीण दोनों मतदाता सूचियों में है, तो उसकी उम्मीदवारी को लेकर विभिन्न अपात्रताएँ लागू होती हैं। यह भी भ्रम फैलाया जा रहा है की राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा पात्रता के संबंध में नए निर्देश जारी किए हैं।

ज्ञात रहे कि राज्य निर्वाचन आयोग ने कांग्रेस पार्टी के नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य की मांग पर जून अन्तिम सप्ताह में निकाय नामावली में नाम होने पर पंचायत में नामांकन निरस्त होने की बात कही थी । इसके बाद जुलाई प्रथम सप्ताह में आयोग ने अपने इस आदेश को पलट दिया था और कहा था कि ऐसे मतदाता पंचायत में भी चुनाव लड़ पायेंगे । इन आदेशों की लोगों और मीडिया में तमाम तरह की व्याख्यायें व चर्चाएं होने के बाद आयोग के सचिव राहुल गोयल ने 9 जुलाई के अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा पात्रता के संबंध में कोई नए निर्देश जारी नहीं किए हैं, जो निर्देश हैं वे पूर्व से पंचायती राज अधिनियम में प्राविधानित हैं। इस नए आदेश में यह भी कहा गया है कि उत्तराखंड में पंचायत चुनाव पूर्ण रूप से उत्तराखण्ड पंचायतीराज अधिनियम, 2016 (यथासंशोधित) के प्रावधानों के अनुसार ही संपन्न कराए जाते हैं।

राज्य निर्वाचन आयोग के इस ‘हाँ’ और ‘ना’ के पत्रों के कारण पंचायत चुनाव के कई वे दावेदार नामांकन नहीं कर पाये हैं जो पंचायत चुनावों में विभिन्न पदों पर प्रत्याशी हेतु दावेदारी करना चाहते थे । आयोग के दो पत्रों से बनी कन्फ्यूजन की स्थिति को देखते हुये ही शायद उसे तीसरा पत्र जारी करता पड़ा। आयोग के अन्तिम दो पत्रों जिसमें निकाय क्षेत्र में नाम होने पर भी पंचायत चुनाव में नांमाकन की स्वीकृति होने की बात कही गयी है उससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले उन लोगों में भारी आक्रोश देखा गया है जो वर्षों से इन चुनावों हेतु तैयार में लगे हैं। उनका कहना है कि निकाय क्षेत्र के अनेक मतदाता धनबल के कारण चुनाव लड़ने ही गाँवों में आ रहे हैं और बाकी उनका गाँवों से कोई लेना -देना नहीं है। उन्होंने इसे अपने अधिकारो का हनन माना है। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र का मतदाता कभी भी निकाय चुनाव में चुनाव लड़ने नहीं जाते ।

इधर, यह भी माना जा रहा है कि जब दोनों जगह निर्वाचक नामावलियों में नाम होने पर मतदाता पंचायत चुनाव लड़ सकता है तो उसे स्वतः ही दोनों जगह नाम होने पर पंचायत चुनाव में वोट देने का अधिकार प्राप्त है। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में इस बात पर भी बहसें हो रही हैं कि उनकों दो जगह वोट देने का अधिकार कैसे प्राप्त हो सकता है।

(देखें 9 जुलाई को राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव का पत्र )

प्रेषक:

सचिव,

राज्य निर्वाचन आयोग,

उत्तराखंड।

विषय: पंचायत चुनाव में उम्मीदवारी की पात्रता के संबंध में भ्रामक सूचना का खंडन।

राज्य निर्वाचन आयोग, उत्तराखंड के संज्ञान में आया है कि विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक संचार माध्यमों पर आगामी पंचायत चुनावों में उम्मीदवार की पात्रता के संबंध में भ्रामक सूचनाएं फैलाई जा रही हैं।

विशेष रूप से, यह गलत प्रचार किया जा रहा है कि यदि किसी उम्मीदवार का नाम शहरी और ग्रामीण दोनों मतदाता सूचियों में है, तो उसकी उम्मीदवारी को लेकर विभिन्न अपात्रताएँ लागू होती हैं। यह भी भ्रम फैलाया जा रहा है की राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा पात्रता के संबंध में नए निर्देश जारी किए हैं।

इस संबंध में, जनसाधारण, संभावित उम्मीदवारों और मीडिया सहित सभी हितधारकों को सूचित एवं स्पष्ट किया जाता है कि उत्तराखंड में पंचायत चुनाव पूर्ण रूप से उत्तराखण्ड पंचायतीराज अधिनियम, 2016 (यथासंशोधित) के प्रावधानों के अनुसार ही संपन्न कराए जाते हैं।

राज्य निर्वाचन आयोग स्वयं इस अधिनियम के प्रावधानों से निर्देशित है और अन्य सभी को भी इन्हीं प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा पात्रता के संबंध में कोई नए निर्देश जारी नहीं किए हैं, जो निर्देश हैं वे पूर्व से पंचायती राज अधिनियम में प्रविधानित हैं।

अधिनियम में किसी भी उम्मीदवार के निर्वाचन हेतु मतदाता सूची में पंजीकरण, मताधिकार, और निर्वाचित होने के अधिकार के संबंध में स्थिति स्पष्ट रूप से वर्णित है:

मत देने और निर्वाचित होने का अधिकार:

अधिनियम की धारा 9(13) के अनुसार, व्यक्ति जिसका नाम ग्राम पंचायत के किसी प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र की निर्वाचक नामावली में सम्मिलित हो, उस ग्राम पंचायत में मत देने और किसी भी पद पर निर्वाचन, नाम-निर्देशन या नियुक्ति के लिए पात्र होगा । इसी प्रकार के स्पष्ट प्रावधान क्षेत्र पंचायत के लिए धारा 54(3) और जिला पंचायत के लिए धारा 91(3) में दिए गए हैं।

इसके अतिरिक्त, पंचायत चुनावों में किसी उम्मीदवार की निरर्हता (Disqualifications) से संबंधित प्रावधान केवल उत्तराखण्ड पंचायतीराज अधिनियम, 2016 की धारा 8 (ग्राम पंचायत के लिए), धारा 53 (क्षेत्र पंचायत के लिए), और धारा 90 (जिला पंचायत के लिए) में विस्तृत रूप से दिए गए हैं।

अतः, सभी से अनुरोध है कि वे ऐसे निराधार प्रचार पर विश्वास न करें और केवल उत्तराखण्ड पंचायतीराज अधिनियम, 2016 के आधिकारिक प्रावधानों तथा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी सूचनाओं पर ही भरोसा करें। किसी भी प्रकार के संशय की स्थिति में, अधिनियम का अवलोकन करें अथवा जिला निर्वाचन अधिकारी एवं आयोग से संपर्क करें।

भवदीय,

(सचिव).

राज्य निर्वाचन आयोग,

उत्तराखंड।

 

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