तो क्या वनों में फलदार वृक्ष लगाने से रुकेंगे मानव – वन्य जीव संघर्ष ?
प्रदेश के सभी 40 वन प्रभागों में सरकार लगायेगी फलदार पौध ।

प्रदेश में मानव – वन्य जीव संघर्ष लगातार जारी है। हिंसक वन्य जीव प्रायः मानव जीवन के लिये खतरा बने हैं। वहीं दूसरी ओर लोगों द्वारा वन्य जीवों का भी लगातर शिकार किया जा रहा है। हिंसक जंगली जानवर वनों में अपने आसियाने में ही रहें और मानवीय बसावटों में दखल न दें इसके लिये प्रदेश सरकार प्रदेश के सभी 40 वन प्रभागों में फलदार पौधों का रोपण करेगी । सरकार को उम्मीद है कि इससे आने वाले समय में मानव – वन्य जीव संघर्ष में कमी आयेगी।
प्रदेश के सभी 40 वन प्रभागों में फलदार वृक्ष रोपित किये जाने की बात मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नैनीताल जिले के रामनगर भ्रमण के दौरान रविवार को जिम कॉर्बेट रिजर्व के ढेला,फाटो रेंज का भ्रमण करने के पश्चात कही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव जीव संघर्ष हमारे लिए एक बड़ी चुनौती है इस चुनौती को दूर करने हेतु निरंतर प्रयास किया जा रहे है, इस मानसून काल में प्रदेश के सभी 40 फॉरेस्ट डिविजनों में फलदार पौधे रोपित करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है। इस मानसून काल में इन सभी डिवीजनों में विभिन्न फलदार प्रजाति के पौध लगाए जाएंगे ताकि वन्य जीव जंतुओं को जंगल से बाहर न आना पड़े उन्हें जंगल में उनका भोजन मिले जिससे मानव जीव संघर्ष भी कम होंगे।
उन्होंने एक पेड़ मां के नाम अभियान जो माननीय प्रधानमंत्री के द्वारा देशवासियों के लिए किए एक आह्वान करते हुए प्रारम्भ किया गया है उसका जिक्र करते हुए कहा कि इस अभियान के अंतर्गत इस मानसून में राज्य में जंगलों में फलदार पौध लगाए जाएंगे। इस हेतु उन्होंने आम लोगों से भी अपील की है कि वह इस अभियान में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करते हुए अधिक से अधिक संख्या में फलदार पौधों का रोपण कर सहयोग दें।
अपने रामनगर भ्रमण के दौरान माननीय मुख्यमंत्री ने यहॉ स्थित रेस्क्यू सेंटर का भी निरीक्षण किया जहां वर्तमानमें 11 टाइगर तथा 13 लेपर्ड हैं। उन्होंने कहा कि इस रेस्क्यू सेंटर को और अधिक विकसित करने हेतु भारत सरकार स्तर पर प्रस्ताव भेज कर इस संबंध में अनुरोध किया जा रहा है। उन्होंने ढेला एवं फाटो रेंज का भ्रमण करने के उपरांत कहा कि यहॉ की प्राकृतिक सुंदरता व वाइल्ड लाइफ अपने आप में मनमोहन है, जो अपनी ओर बार बार यहॉ खींच लाती है। उन्होंने कहा कि फाटो रेंज को 12 महीने के लिए खोला जा रहा है ताकि यहां वर्ष भर पर्यटक आए, उन्होंने कहा कि वर्तमान में यहां 100 से अधिक जिप्सियों संचालित हो रही हैं जिससे लोगों को रोजगार मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह एक रोजगार का बेहतर माध्यम है गत वर्षों में यहां 25 करोड़ से अधिक धनराशि का रोजगार स्थानीय लोगों को मिला है ।
सर्वविदित है कि हिंसक जंगली जानवरों यथा बाघ, लेपर्ड, गुलदार, हाथी व भालू आदि गाँवों में घुसकर आम लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। प्रायः प्रतिवर्ष दर्जनों लोगों को इनकी वजह से जान से हाथ धोना पड़ रहा है। यही नहीं बन्दर और लंगूर भी आम ग्रामीणों के लिये मुसीबत का सबब बने हैं। तमाम प्रयासों के बाद भी इनकी रोकथाम नहीं हो पा रही है । ऐसी स्थिति में सरकार का यह निर्णय मानव – जीव संघर्ष रोकने में कितना कामयाब होगा यह आने वाला वक्त बतायेगा । लेकिन इन्हें पूरी तरह रोकने के लिये सरकार को कुछ बड़े व कड़े कदम उठाने भी आवश्यक होंगे ।




बहुत ही सहारनीय कार्य होगा, लेकिन इसका परिणाम इसके सही क्रियान्वयन के बाद ही मिल पाएगा।।।