उत्तराखंड

गढ़वाल-कुमाँऊ को जोड़ने को अभी तक नही बन पायी कंडी चिल्लरखाल सड़क

कंडी मोटरमार्ग निर्माण हेतु कोटद्वार से दिल्ली तक पैदल मार्च

*गढ़वाल कुमाऊं का सेतु है, कंडी लालढांग चिल्लरखाल मोटरमार्ग*

*आज भी कुमाँऊ जाने के लिये उत्तर प्रदेश होकर जाना पड़ता है।*

दिनांक : 1 सितम्बर , 2025

डॉ० योगेश धस्माना

गढ़वाल कुमाऊं के बीच ऐतिहासिक और सामरिक महत्व के मार्ग कंडी रोड और चिल्लर मोटर मार्ग की मांग को लेकर कोटद्वार की जनता एक बार फिर लामबंद हो रही है।

सन 1962 के भारत चीन युद्ध के समय ओर बाद में भी अनेक वर्षों तक इस मार्ग से जनता का हरिद्वार, ऋषिकेश, देहरादून का सड़क संपर्क बना हुआ था। उत्तरप्रदेश के समय तो इस मार्ग को पर्यटन को यातायात के नक्शे पर दिखाया जाता रहा। किंतु राज्य बनने के बाद इसे न सिर्फ नक्शे से ही गायब कर दिया, बल्कि कॉर्बेट पार्क को गढ़वाल से अलग कर, पूरी तरह से नैनीताल जनपद का हिस्सा दिखाया जाने लगा।इसका एक बड़ा कारण यह भी रहा कि कोटद्वार से रामनगर जाने वाले लोगों को आज दिन तक नजीबाबाद, धामपुर अफजलगढ़ कालागढ़ होकर 165 किमी की यात्रा कर नैनीताल तक पहुंचना पड़ रहा है। जब की यदि कोटद्वार से कालागढ़ होकर यह दूरी मात्र 95 किमी की रह जाती है। पिछले 200 सालों से गढ़वाल कुमाँऊ के लोग इस मोटरमार्ग के बनने और खुलने का इन्तजार कर रहे हैं।

गढ़वाल – कुमाऊं के बीच पुराना कंडी मार्ग यदि कोटद्वार, दुगड़ा, सीतामढ़ी , मैदावेन कांडा, लोहचौड़ ढिकाला तक, और यहां से दूसरी ओर दुर्गा देवी धनगढ़ी मार्ग को फिर से खोले जाने से नैनीताल उच्च न्यायालय जाने वाले लोगों के लिए सुगम होगा, साथ ही यूपी के रास्ते जनता को भी दोहरे टैक्स न देकर मार्ग बनने के बाद कम दूरी भी तय करनी पड़ेगी।

आज की दूसरी बड़ी जन आवश्यकता कोटद्वार लालढांग चिल्लरखाल मोटरमार्ग की है । वन अधिनियम की आड में इस मार्ग में भी कुछ स्वार्थी लोग रोड़े अटकाए हुए हे। जब राजाजी नेशनल पार्क और कॉर्बेट पार्क के बीच पर्यटकों को सैर कराने सड़क और एलिवेटेड सड़क बन सकती है, तो गढ़वाल के बीरोंखाल, नैनीदांडा, थलीसैंण, पोखड़ा, दुगड़ा, की लगभग 12 लाख की जनता को इसका लाभ मिलना ही चाहिए।

इसी तरह लालढांग चिल्लर खाल हरिद्वार मोटर मार्ग की कहानी भी है। राज्य बनने के 25 वर्षों बाद भी राज्य की जनता को नजीबाबाद उत्तर प्रदेश से हो कर देहरादून पहुंचना पड़ रहा हैं। यदि इस मार्ग के निर्माण में वन विभाग ओर राजाजी पार्क के नियम बाधक बने हुए है तो फिर हरिद्वार में राजाजी पार्क के जंगलों से एलिवेटेड रोड कैसे बनी है।

गढ़वाल मोटर ऑनर्स यूनियन के पूर्व अध्यक्ष और संचालक मंडल के सदस्य डॉ० वेद प्रकाश माहेश्वरी और विजय माहेश्वरी बताते हे कि राज्य बनने के बाद नित्यानंद स्वामी की सरकार में मंत्री मोहन सिंह गांववासी के समय कोटद्वार कालागढ़ से रामनगर तक चलने वाली जी एम ओ यू की बस को यह कह कर टैक्स मुक्त रखा गया था, कि यह गढ़वाल कुमाऊं की लाइफ लाइन है। माना जा रहा था कि इससे दोनों मंडलों की जनता को एक दूसरे के साथ नजदीक आने का अवसर और समझ बढ़ाने का भी मौका मिलेगा। पर गांववासी जी के हटते ही जनता को मिलने वाली सुविधा को बंद कर दिया गया।

आज कोटद्वार के जागरूक नागरिक प्रवीण थापा इस सड़क निर्माण की मांग पर कोटद्वार से दिल्ली तक पैदल चलकर जन समर्थन जुटाने पहुंचे हैं, पर अभी तक हमारे राज्य के पांचों सांसदो के कानों में जू तक नहीं रेगी । आखिर क्यों ? आज कोटद्वार भाबर की जनता जिस तरह सड़कों पर उतरी है, उससे लगता है कि अब इस मांग को लंबे समय तक टालना भाजपा सरकार के लिए राजनीतिक भू – स्खलन के समान होगा।

आज यदि हमारे सांसद गण और विधायक ऋतु खंडूरी आगे आ कर इस जन हित की मांग पर जनता का साथ नहीं देते हैं, तो यह संघर्ष उनके राजनीतिक भविष्य के लिए वाटर लू साबित हो सकता है।

अतः एक बार पुनः अपने जनप्रतिनिधियों से मांग है कि कॉर्बेट पार्क को पर्यटन नक्शे में गढ़वाल को अंकित कर कंडी मार्ग पर भी सड़क स्वीकृत कराकर दोनों गढ़वाल कुमाऊं मंडलों की न सिर्फ दूरी कम होगी, वरन इससे दोनों क्षेत्रों के बीच सामाजिक सांस्कृतिक संबंधों को भी बढ़ावा मिल सकेगा।

यह है कंडी मार्ग की स्थिति

रामनगर-लालढांग (18 किलोमीटर पक्का)

लालढांग से कालागढ़- (20 किलोमीटर कच्चा)-कालागढ़ क्षेत्र (तीन किलोमीटर पक्का) – कालागढ़ से पाखरो (22 किलोमीटर कच्चा)

पाखरो से कोटद्वार (20 किलोमीटर पक्का)

कोटद्वार से चिलरखाल (13 किलोमीटर पक्का)

चिलरखाल से लालढांग तक (13 किलोमीटर कच्चा)

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