उत्तराखंड

सांसद बने उत्तराखण्ड से, चिन्ता है हरियाण, उत्तर प्रदेश की

अन्य राज्यों में सांसद निधि खर्च करने में टिहरी सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह और राज्यसभा सांसद नरेश बंसल सबसे आगे

पौड़ी। 21 जनवरी, 2026

जब दिल में दर्द ही नहीं है तो आप ऐसा ही करेंगे। हम ऐसा सोचते कि हमारे सांसद है तो हमारे बारे में ही सोचेंगे। सोचना भी चाहिए। परन्तु उनका क्या? उन्हें तो सरी भूमि गोपाल की नजर आती है। बड़ा दिल है साहब उनका। वे उत्तराखण्ड के लिये ही नहीं सोचते! वे हरियाणा, उत्तर प्रदेश और गुजरात के लिये भी सोचते हैं। तो क्या अब यह माना जाय कि उत्तराखण्ड में हमारी डब्बल इंजन सरकार ने इतना विकास कर दिया कि हमारे कुछ सांसद अब अपने प्रदेश की फ्रिक न कर अन्य राज्यो के बारे में भी सोचने लगे हैं।

अगर हम इन्हीं कुछ सांसदों के नजरिये से सोचें तो यह उनका विशेषाधिकार है कि वे अपनी सांसद निधि कहाँ खर्च करते हैं। नियमो में बदलाव हुआ, तो यह संभव हुआ कि सांसद बाहरी राज्यों में अपनी निधि खर्च कर सकते हैं। केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के 13 अगस्त, 2024 को पीएम फंड खर्च में संशोधन किए हैं। अब सांसद देश में कहीं भी एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 50 लाख तक खर्च कर सकते हैं।

अब उन्हें अधिकार हैं तो बेशक वे अन्य राज्यों में खर्च कर सकते हैं लेकिन सवाल यह है कि अन्य राज्यों के कितने सांसद इस गरीब, पिछड़े पहाड़ी राज्य में अपनी सांसद निधि खर्च कर रहे हैं? सांसद निधि का मूल उद्देश्य तो यही है कि सांसद उस निधि से अपने क्षेत्र का विकास करे लेकिन विकास तब करेगा जब उसे लगता हो कि जहां से उससे सांसद बनाया गया है उसे उस क्षेत्र का भला करना है। जब मन में ऐसी सोच ही नहीं तो कोई  इतनी बड़ी रकम कहीं भी खर्च करे ?

अब हमें तो पहले से ही पता है कि राज्य लक्ष्मी शाह, नरेश बसल, तरुण विजय, कल्पना सैनी जैसे हमारे सांसद केवल हमारे बारे में ही सोचेंगे हमें इस मुगालते में नहीं रहना। यह इनकी पार्टी की मजबूरी हो सकती है कि ऐसे लोगों के हाथों उत्तराखण्ड का नेतृत्व सौंपे, उत्तराखण्ड के लोगों की  मजबूरी नहीं कि इन्हें अपना नेता माने। ये तो पूरे देश के नेता है इसलिये इन्हें केवल उत्तराखण्ड के लिये नहीं सोचना होता है।

आज उत्तराखंड के कई गांव जहाँ कई बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे, आपदा से ग्रस्त हैं, वहीं राज्य के हमारे सांसद अपनी निधि का एक बड़ा हिस्सा दूसरे राज्यों में खर्च कर रहे हैं। शायद इस बात का पता भी नहीं चलता यदि सूचना के अधिकार (आरटीआई) में इसका खुलासा नहीं हुआ होता।

आरटीआई से मिले दस्तावेजों के अनुसार सांसदों ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में ट्यूबवेल लगवाने, स्कूल व सामुदायिक भवन निर्माण और जल निकासी जैसे कार्यों के लिए 1.28 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। दूसरे राज्यों पर दरियादिली दिखाने में टिहरी गढ़वाल सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह सबसे आगे हैं। शाह ने उत्तर प्रदेश के आगरा जिले पर विशेष ध्यान दिया है। इस जिले के लिए उन्होंने वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल एक करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की। इसमें फुटपाथ, पैदल मार्ग, पेयजल से जुड़े कार्य शामिल थे।

इधर, टिहरी सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह ने कहा कि उत्तराखंड के लोग पूरे देश में में रहते हैं। कुछ लोग अपनी जरूरतों के लिए मेरे पास आए थे तो कुछ कार्यों को मंजूरी दी गई है। टिहरी का विकास मेरी प्राथमिकता है और मेरी निधि का अधिकांश हिस्सा यहीं खर्च होता है।

वहीं, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने हरियाणा में स्कूल, कॉलेज, सामुदायिक भवनों के लिए 25 लाख आवंटित किए।

राज्यसभा सांसद तरुण विजय के कार्यकाल (2010-16) के दौरान स्वीकृत धनराशि 10 दिसंबर 2025 को आवंटित की गई। उन्होंने उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में जल निकासी, सड़कों आदि के लिए तीन लाख रुपये स्वीकृत किए थे।

सोशल मीडिया पर आरटीआई के खुलासे के बाद इन सांसदों पर लोग अपना गुस्सा निमाल रहे हैं। लोगों में इस बात को लेकर बेहद नाराजगी है कि इन सांसदों को दूसरे राज्यों की चिन्ता है लेकिन उत्तराखण्ड की नहीं।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि जिस प्रदेश से सांसद चुने जाते हैं, वहां की जनता को उनसे बहुत उम्मीदें होती हैं। हमारा प्रदेश आज भी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए संघर्ष कर रहा है। ऐसे में सांसद निधि को बाहर के प्रदेशों में खर्च करना प्रदेश की जनता की उम्मीदों को दरकिनार करना है। इसे सीधे तौर पर जनभावनाओं का अपमान है। जनता के साथ धोखा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button