उत्तराखंड

पुराना कलक्ट्रेट बनेगा अब पांच दीर्घाओं वाला हेरिटेज म्यूजियम

समीक्षा बैठक में निर्माणदायी संस्था ने पीपीटी के माध्यम से प्रस्तावित स्वरूप और प्रदर्शित की जाने वाली सामग्रियों की जानकारी दी

हेरिटेज म्यूजियम: साकार होगा पौड़ी की विरासत को संजोने का सपना, जिलाधिकारी ने की समीक्षा

पांच दीर्घाओं से म्यूजियम को बनाया जाएगा आकर्षक

पौड़ी के गौरवशाली इतिहास को मिलेगा स्थायी मंच, हेरिटेज म्यूजियम की तैयारियां तेज

पौड़ी। 24 फरवरी, 2026

मुख्यालय में पुराने कलक्ट्रेट भवन में हेरिटेज म्यूजियम बनाया जायेगा। जिलाधिकारी स्वाति एस० भदौरिया ने आज इस निर्माणाधीन भवन की प्रगति समीक्षा के साथ विरासत भवन में बनने वाले हेरिटेज म्यूजियम की विस्तृत जानकारी ली और इसे जनपद की पहचान के अनुरूप बेहतरीन हेरिटेज म्यूजियम बनाये जाने पर जोर दिया।

यहाँ बताते चलें कि पौड़ी के अपर बाजार, धारा रोड, मॉल रोड और बाजारों को एक हेरिटेज स्ट्रीट के रूप में विकसित किया जाना है। इसके लिए ब्लूप्रिंट भी तैयार कर लिया गया है। वहीं, मुख्य स्टेशन से अपर बाजार जाने वाले मार्ग की सभी दुकानों को फसाड (Facade) लाइटिंग से सजाया जाना है। इसे पहाड़ी शैली से बनाया जाना है ताकि शहर सुंदर और आकर्षित लगे। जिला प्रशासन हेरिटेज स्ट्रीट के लिये बैठकें भी कर चुका है।         

अब इधर, हेरिटेज म्यूजियम के इस हेरिटेज स्ट्रीट के साथ होने से पौड़ी के पर्यटन विकास को काफी बल मिलने मिलने की संभावना जतायी जा रही है। हालाँकि पिछले कुछ समय से इस विरासत भवन पर जिसे अब हेरिटेज म्यूजियम के तौर पर विकसित किया जा रहा है धीमी गति से काम चल रहा है। बताया जा रहा है कि ठेकेदार का भुगतान होने के बाद शीघ्र ही इस भवन पर कार्य पूर्ण कर दिया जायेगा।

ज्ञात हो कि पौड़ी में 1850 में निर्मित ब्रिटिशकालीन पुराना कलेक्ट्रेट भवन एक नए “विरासत भवन” (Heritage Building) के रूप में पुनर्जीवित किया जा रहा है। लगभग 243.63 लाख रुपये की लागत से, इस ऐतिहासिक स्थल को संरक्षित कर एक टूरिस्ट डेस्टिनेशन, म्यूजियम और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह पुरानी यादों और वास्तुकला को संजोए हुए है। 1850 में निर्मित यह भवन 11 वर्षों में बनकर तैयार हुआ था, जो भारतीय सिविल सेवा (ICS) के दौर की याद दिलाता है। नया कलेक्ट्रेट भवन बनने के बाद, 2021 में पुराने कलेक्ट्रेट को खाली कर दिया गया था।                                     

जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने आज एनआईसी कक्ष में इसी विरासत भवन (हेरिटेज म्यूजियम) की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान निर्माणदायी संस्था ने पीपीटी के माध्यम से प्रस्तावित स्वरूप और प्रदर्शित की जाने वाली सामग्रियों की जानकारी दी, जिस पर जिलाधिकारी ने म्यूजियम को जनपद की पहचान के अनुरूप विकसित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने कहा कि प्रस्तावित म्यूजियम पौड़ी के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विकास को एक समग्र रूप में प्रस्तुत करेगा। उन्होंने निर्देशित किया कि इसमें पारंपरिक ढोल-दमाऊ, प्राचीन आभूषण एवं वेशभूषा, दुर्लभ छायाचित्र, हिमालय से जुड़ी थ्री-डी प्रस्तुतियां और अन्य महत्वपूर्ण धरोहरों को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाए, जिससे आगंतुकों को जनपद की विरासत का वास्तविक अनुभव हो सके।

बैठक में प्रस्तावित हेरिटेज म्यूजियम की अवधारणा को और अधिक समृद्ध एवं आकर्षक बनाने के उद्देश्य से इसकी विभिन्न थीम आधारित दीर्घाओं (हॉल) पर विस्तार से चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने बताया कि म्यूजियम में ‘विरासत भूमि हॉल’ के माध्यम से जनपद के ऐतिहासिक विकास, प्राचीन सभ्यता और महत्वपूर्ण पड़ावों को प्रदर्शित किया जाएगा, वहीं ‘वीर भूमि हॉल’ में वीरभूमि पौड़ी के शहीदों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं सैन्य परंपरा से जुड़े गौरवशाली योगदान को सम्मानपूर्वक स्थान दिया जाएगा। ‘लोक संस्कृति हॉल’ में जनपद की समृद्ध लोक परंपराओं, पारंपरिक वाद्य यंत्रों, वेशभूषा, आभूषण, लोक कला एवं रीति-रिवाजों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा, जबकि ‘तपोभूमि हॉल’ में जनपद के प्राचीन मंदिरों, आध्यात्मिक स्थलों, ऋषि-मुनियों की तपस्थली और धार्मिक महत्व को दर्शाया जाएगा। इसके अतिरिक्त ‘प्राकृतिक हॉल’ में हिमालय की अनुपम प्राकृतिक सुंदरता, जैव विविधता, नदियों, वन संपदा और प्राकृतिक विरासत को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि म्यूजियम परिसर में आगंतुकों के लिए कैफेटेरिया की भी व्यवस्था प्रस्तावित की गई है, जिसमें पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों को शामिल किया जाएगा, ताकि यहां आने वाले पर्यटक न केवल जनपद की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से रूबरू हो सकें, बल्कि स्थानीय खान-पान की विशिष्टता का अनुभव भी कर सकें। यह कैफेटेरिया स्थानीय उत्पादों और व्यंजनों को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार सृजन का माध्यम भी बनेगा।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि म्यूजियम में जनपद के प्रमुख आंदोलनों, ऐतिहासिक घटनाओं और सामाजिक योगदानों को भी समुचित स्थान दिया जाए। साथ ही भवन को पारंपरिक स्वरूप प्रदान करते हुए पठाल का फर्श, प्राचीन उपयोगी वस्तुएं तथा मंदिरों के इतिहास को भी शामिल किया जाए। उन्होंने प्रमाणिक जानकारी संकलित करने के लिए विषय विशेषज्ञों से समन्वय स्थापित करने और 28 फरवरी तक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए, ताकि कार्य समयबद्ध रूप से प्रारंभ किया जा सके।

इस अवसर पर अधिशासी अभियंता लोनिवि रीना नेगी, सहायक अभियंता पुरातत्व अनिल सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

 

 

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