‘दीदी कैफे’ में पहाड़ी व्यंजनों की खुशबू से रूबरू होना ग्राहकों की पहली पसन्द
स्वरोजगार को बढ़ावे के साथ 'दीदी कैफे' ने बनायी एक अलग पहचान। बाहर से भी कैफे में आते हैं लोग।

पौड़ी । 01 मार्च, 2026
यहाँ पौड़ी ब्लाक के निकट संचालित ‘दीदी कैफे’ ने अल्प समय में अपनी अलग पहचान बना ली है। दीदी कैफे में पहाड़ी ब्यजनों की खुशबू से रूबरू होना ग्राहकों की पहली पसन्द बनती जा रही है।
15 अगस्त 2023 को शुरू हुए इस कैफे में जहां स्थानीय समूह की महिलाएं रोजगार से जुड़ रही हैं, वहीं पहाड़ी व्यंजनों को बढ़ावा देकर यह कैफे क्षेत्र के लिए आकर्षण का केंद्र भी बन गया है। कैफे का संचालन समूह की 4 महिलाएं तथा 2 पुरुष रसोइये कर रहे हैं। कैफे में आने वाले लोगों को पारंपरिक पहाड़ी स्वाद परोसा जा रहा है। यहां पहाड़ी दाल, चौंसा, लाल चावल का भात, कंडाली की सब्जी, मंडुवे की रोटी सहित कई स्थानीय व्यंजन तैयार किए जाते हैं। खास बात यह है कि पहाड़ी भोजन के साथ-साथ मंडुवे के मोमो भी लोगों की पसंद बन चुके हैं, जिसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
गौरतलब है कि दीदी कैफे के भवन का मरम्मत कार्य जिला योजना के माध्यम से कराया गया था। वहीं हिमोत्थान समिति देहरादून (टाटा ट्रस्ट) के सहयोग से कैफे को बर्तन एवं आवश्यक सामग्री उपलब्ध करायी गयी हैं। इससे कैफे की सुविधाएं बेहतर हुई हैं और संचालन को मजबूती मिली है। 
कैफे से प्रतिदिन औसतन 3500 से 4 हजार रुपये की कमाई हो रही है। वहीं महीने में इसका टर्नओवर 1 लाख से 1.20 लाख रुपये तक पहुंच रहा है। वार्षिक टर्नओवर लगभग 12 से 13 लाख रुपये है, जिसमें से वार्षिक की करीब 4.50 से 5 लाख रुपये तक की शुद्ध बचत हो रही है। कैफे में स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले पर्यटक और आगंतुक भी पहाड़ी व्यंजनों का स्वाद लेने पहुंच रहे हैं। इससे समूह से जुड़ी महिलाओं को नियमित रोजगार मिल रहा है और स्थानीय उत्पादों को भी बढ़ावा मिल रहा है।
मुख्य विकास अधिकारी गिरीश गुणवंत ने कहा कि दीदी कैफे महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में एक सफल मॉडल बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि स्थानीय पहाड़ी व्यंजनों को बाजार से जोड़कर महिलाओं की आय बढ़ायी जा रही है। दीदी कैफे के माध्यम से समूह की महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं और यह पहल अन्य समूहों के लिए भी प्रेरणादायक है।



