विशाल प्रदर्शन ने साबित किया कि जन दबाब के आगे ही झुकती है सरकार
नजीर बना चौखुटिया का मेगा प्रदर्शन, सरकार आयी घुटनों पर

पौड़ी। दिनांक 17 अक्टूबर, 2025
बिन लड़े कुछ भी यहां मिलता नहीं ये जानकर, अब लड़ाई लड़ रहे हैं लोग मेरे गांव के ।।
अल्मोड़ा के चौखुटिया में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली के खिलाफ हुए विशाल जनाक्रोश प्रदर्शन ने मशहूर शायर बल्ली सिंह चीमा की कविता की उक्त पंक्तियों को सार्थक कर दिया है। सरकार ने इस विशाल जन आक्रोश प्रदर्शन के दूसरे दिन ही चौखुटिया क्षेत्र की जनता की जायज मांग को पूरा कर दिया । चौखुटिया वासियों की यह लड़ाई पूरे पहाड़ के लिये एक नजीर बन गयी है कि अपने हक हकूक के लिये संघर्ष करना होगा तभी मिलेगा अन्यथा इतने सालों से पहाड़ के लोग अभी भी मूलभूत सुविधाओं का इन्तजार करते आ रहे हैं।
इधर, चौखुटिया में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर उच्च न्यायालय मैं भी एक जनहित याचिका दायर की गयी है। बहरहाल, सरकार ने इस मेगा प्रदर्शन के बाद चौखुटिया में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतरी हेतु आदेश जारी कर दिया है। (देखें आदेश)

इस प्रचण्ड आंदोलन के दबाब में आयी सरकार ने बुधवार को चौखुटिया क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाओं में व्यापक सुधार के निर्देश दिए थे। जन आंदोलन के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (सीएचसी) चौखुटिया को 30 से बढ़ाकर 50 शैय्यायुक्त उप जिला चिकित्सालय में उच्चीकृत करने की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान कर दी गयी है ।

प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि 50 शैय्यायुक्त उप जिला अस्पताल में आईपीएचएस मानकों के अनुरूप विशेषज्ञ चिकित्सकों, चिकित्सकों, नर्सिंग स्टॉफ, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन सहित अन्य मेडिकल स्टॉफ की तैनाती की जा रही है। इसके अलावा अस्पताल में नई डिजिटल एक्स-रे मशीन सहित अन्य चिकित्सकीय उपकरण उपलब्ध कराये जा रहे हैं। एसडीएच मानकों के अनुरूप अवसंरचनात्मक कार्यों व आवश्यक पदों के सृजन को लेकर स्वास्थ्य महानिदेशक को यथाशीघ्र प्रस्ताव शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दे दिये गये हैं। डॉ. रावत ने बताया कि चौखुटिया में अस्पताल के उच्चीकरण होने से आमजन को स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही इसका लाभ विकासखण्ड द्वाराहाट, भिकियासैण के साथ-साथ ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैण के कई गांवों को मिल सकेगा।
इधर, सामाजिक कार्यकर्ता कुसमलता बौड़ाई ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। इसमें कहा गया कि चौखुटिया क्षेत्र के लोग बदहाल स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण अकाल मृत्यु का ग्रास बन रहे हैं। यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद रिक्त चल रहे हैं। यहां सिर्फ डेंटल सहायक ही कार्यरत हैँ। सीएचसी के मानकों के अनुसार यहां यहां 291 उपकरण होने चाहिए, लेकिन यहां 20 ही उपकरण हैं। मरीजों को हल्के से पेट दर्द और बुखार के उपचार के लिए हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है। कुछ उपकरण आंदोलन की उग्रता के के कारण बढ़ाए गए हैं। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पूर्व एक युवा की उंगली कट गई थी जिसको परिजन उपचार के लिए लाए थे, लेकिन चौखुटिया सीएचसी में टीटनेश का इंजेक्शन तक उपलब्ध नहीं हो पाया था। इससे साफ पता चलता है कि लोगों को किस स्तर की सुविधा सीएचसी चौखुटिया में मिल रही होंगी। अस्पताल में 95 ग्राम पंचायतों की 46 हजार से अधिक की आबादी निर्भर है इसके बाद सरकार को लोगों का दर्द नहीं दिख रहा है। उन्हें लोगों का दर्द का महसूस नहीं होता है इसलिए उन्होंने जनहित याचिका दायर कराई। जनहित याचिका दायर करने में उनके साथ कार्तिक उपाध्याय भी मौजूद रहे। ( नीचे लिंक को सलेक्ट कर ओपन करें और देखें वीडियो । ) https://www.facebook.com/share/r/15JHDLBzcGs/
चौखुटिया के इस प्रचण्ड जन आंदोलन ने पूरे पहाड़ की जनता की आँखे बोल दी हैं। यह एक तरह की नजीर भी बन गया है कि यदि अपनी जायज मांग के लिये संघर्ष करना है तो लोगों को एकजुट और एकमुट होकर आंदोलन में उतरना होगा । पूरे पहाड़ में आज स्वास्थ्य और शिक्षा का कमोवेश चौखुटिया जैसे या उससे भी बदत्तर हालात हैं । इस जन आंदोलन ने सरकार को भी चेता दिया है कि यदि मूलभूत सुविधाओं पर काम नहीं किया गया तो कभी भी जनता उग्र आंदोलन कर सकती है।



