गौं-गुठ्यार

बरस्वार गाँव में जितेन्द्र की पुत्री याशिका को गुलदार ने बनाया शिकार

आदमखोर वन्य जीव के गाँवों में घुसने पर आत्मरक्षा हेतु उसे मारने का अधिकार दे केन्द्र सरकार

पौड़ी। 24 जनवरी, 2026

लैसडाउन वन प्रभाग के अन्तर्गत जयहरीखाल ब्लाक के बरस्वार गाँव में कल सांय एक डेढ वर्षीय बालिका को गुलदार ने अपना शिकार बनाया है। इस इलाके में गुलदार पहले भी सक्रिय रहा है इसलिये ग्रामीण लागतार दहशत में हैं।

शनिवार शाम लगभग 6:30 बजे ग्राम पंचायत बरस्वार में पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य वीरेंद्र लाल की पोती याशिका पुत्री जितेंद्र, अपने माता-पिता के साथ घर के आंगन में थी। इसी दौरान अचानक आए गुलदार ने बालिका को माता-पिता की आंखों के सामने उठाया और जंगल की ओर ले गया। शोर-शराबा हुआ लेकिन गुलदार बालिका को दबोच कर ले जाने में कामयाब रहा।  तुरन्त ही आसपास के ग्रामीण खोज में जुटे।

ग्रामीणों के काफी प्रयासों के बाद रात करीब 9 बजे बालिका का शव लगभग 30 मीटर दूर झाड़ियों में मिला। उसे स्थानीय कैंट अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

घटना की सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। वन विभाग द्वारा क्षेत्र में गश्त बड़ा दी गयी है और पिंजड़े लगाये जा रहे हैं।

इस इलाके में लगातार हो रहे गुलदार के हमलों के कारण ग्रामीण डरे हुए हैं। इससे पूर्व सिरोबाड़ी में महिला को गुलदार ने मार डाला था। अब बच्ची की मौत के कारण वन विभाग व प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है।

क्षेत्रीय विधायक दिलीप रावत ने इन घटनाओं को      दु:खद बताया है और प्रशासन से ठोस कदम उठाने की मांग की है, साथ ही चेतावनी दी है कि यदि सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई तो वे कड़े कदम उठा सकते हैं। 

उत्तराखण्ड में मानव वन्य जीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं के कारण पूरा उत्तराखण्ड सहमा हुआ है। कब, कहाँ गुलदार, बाघ या भालू किसकी जान ले ले नहीं पता लेकिन अब तक लगभग हर हफ्ते उत्तराखण्ड में एक व्यक्ति की इन वन्य जीवों के हमले में जान जा रही है। सरकार केवल फौरी कार्रवाई कर है। प्रदेश सरकार यहाँ आमजन को वन्य जीवों के हमलों में कुछ राहत दे सके इसका उसे अधिकार भी नहीं लेकिन केन्द्र सरकार से इस हेतु पहाड़ के गाँवों में आत्मरक्षा हेतु इन्हें मारे जाने का अधिकार देने काअनुरोध तो केन्द्र सरकार से कर ही सकती है। दुर्भाग्य से हमारी सरकार इस मामले में मौन साधे है। सरकार फौरी उपाय करने व मुआवजा बांटने तक ही सीमित है।

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