पौड़ी । उत्तराखंड शासन ने जिला पंचायत पौड़ी गढ़वाल में तदर्थ कनिष्ठ अभियंता सुदर्शन सिंह रावत की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। वे पिछले कुछ महीनों से निलम्बित चल रहे थे। शासन की जांच में उनके खिलाफ कई गंभीर अनियमितताएं और पद के दुरुपयोग के मामले सत्य पाये गये हैं।
पंचायती राज सचिव चंद्रेश कुमार ने 21 जुलाई को इस आशय का आदेश जारी किया। इंजीनियर रावत को अक्टूबर 2024 में निलंबित कर दिया गया था । उनके खिलाफ निदेशक स्तर की जांच शुरू की गयी थी।
निदेशक स्तर की जांच में पाया गया कि उन्होंने प्रभारी अभियंता के रूप में स्वयं भवन/होटल के मानचित्र स्वीकृत किए हैं, जबकि यह अधिकार उन्हें नहीं था। इसके अलावा, एक फर्म मैसर्स बुटोला इण्टरप्राइजेज नामक फर्म जिसमें उनकी पत्नी की 25% हिस्सेदारी थी और जिसे आपसी फायदे के लिये चलाया जा रहा था, को अनुचित लाभ पहुँचाया। इस फर्म को 1.47 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान हुआ, जबकि उन्होंने इसकी जानकारी विभाग को नहीं दी और नियमों का उल्लंघन किया।
निदेशक पंचायतीराज द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन ने माना कि सुदर्शन सिंह रावत की कार्यशैली विभाग के प्रतिकूल है। उन पर लगाये गये आरोप , लांछन अत्यन्त गम्भीर प्रवृति के हैं। विभाग के प्रति उनकी सत्यनिष्ठा संदिग्ध पायी गयी है। अतः उनकी सेवाएं निलंबन की तिथि 21 अक्टूबर 2024 से ही उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। निलंबन अवधि में उन्हें केवल जीवन निर्वाह भत्ता ही देय होगा, अन्य कोई भुगतान नहीं किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि एक समय जिला पंचायत में कनिष्ठ अभियंता सुदर्शन रावत अत्यधिक प्रभावशाली कार्मिक थे। उन्होंने जिला पंचायत में अनेकानेक अनियमिताएं की हैं। जिनकी विभिन्न स्तरों पर जांच भी हुई हैं। उनके खिलाफ कई समाचार पत्रों में भी आरोप लगे हैं और कई आन्दोलन भी जिला पंचायत सदस्यों ने किये हैं। आखिर उन की कारगुजारियों की सजा उन्हें मिली गयी । सुदर्शन रावत को सजा तो मिल गयी लेकिन उनके ऊपर के अधिकारी जो उनके इन कार्यो पर आंखें मूंदे रहे उन्हें कब कटघरे में खड़ा किया जायेगा । तत्कालिक जिला पंचायत अध्यक्ष की क्या भूमिका थी क्या इसकी भी जांच होगी?
देखें आदेश





