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रक्षासूत्र आन्दोलन ने गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर हजारों पेड़ों को कटने से बचाया

मगर चौड़ीकरण में अब भी कट रहे हैं 1413 पेड़

उत्तरकाशी। दिनांक 14 दिसम्बर, 2025

यह उत्तरकाशी के गंगोत्री क्षेत्र में पेड़ो पर रक्षा सूत्र बाँधकर चलाये गये आंदोलन का ही असर है कि अव राष्ट्रीय राजमार्ग की चौड़ाई घटा कर एक मीटर कम कर दी गयी है। उत्तरकाशी से भैरोंघाटी तक लंबित गंगोत्री हाईवे का चौड़ीकरण अब 12 मीटर नहीं बल्कि 11 मीटर ही होगा।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सड़क चौड़ीकरण को एक मीटर घटाने का निर्णय लिया है।गंगोत्री हाईवे चौड़ीकरण परियोजना के तहत अब हजारों पेड़ों का कटान नहीं होगा। गंगोत्री हाईवे चौड़ीकरण के लिए सड़क परिवहन मंत्रालय और बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) ने 6822 पेड़ काटने की अनुमति मांगी थी, जिसे सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानते हुए केंद्र ने मंजूरी भी दे दी थी। लेकिन पर्यावरण प्रेमी व स्थानीय लोग इसका विरोध कर रहे थे।

सड़क चौड़ीकरण में हजारों देवदार के पेड़ों को काटे जाने का पर्यावरणविदों व स्थानीय लोगों ने कड़ा विरोध किया था। उनका कहना था कि इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटान न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंचाएगी, बल्कि आपदा जोखिम भी बढ़ाएगी।

पिछले रविवार को स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने हजारों की संख्या में इकट्ठा होकर पेड़ों पर रक्षासूत्र बांधा और कटान रोकने की मांग की थी। अब रक्षासूत्र आंदोलन के बाद सरकार और BRO ने सड़क चौड़ाई के मानकों में बदलाव कर हजारों पेड़ों को बचाने का रास्ता निकाल  है।

सड़क के मानक बदलने के बाद BRO ने स्पष्ट किया है कि अब हाईवे पर 6822 की जगह केवल 1413 पेड़ ही काटे जाएंगे। इससे हजारों पेड़ों को बचाया जा सकेगा। साथ ही, करीब एक हजार पेड़ों का ट्रांसप्लांटेशन भी किया जाएगा।

BRO बड़ैथी से भैरव घाटी तक लगभग 90 किलोमीटर सड़क तैयार कर रहा है। यह मार्ग चीन सीमा तक सेना की आवाजाही को आसान बनाने के लिए तैयार किया जा रहा है।

BRO के कमांडर राजकिशोर सिंह के अनुसार, चौड़ाई कम होने से पेड़ों का कटान काफी कम होगा और परियोजना भी सुचारू रूप से आगे बढ़ेगी।

आंदोलन कारियों ने झाला से भैरों घाटी के बीच ऑल वेदर सड़क चौड़ीकरण के विरोध में देवदार के असंख्य पेड़ों पर रक्षासूत्र बांधने का अभियान चलाया था। गत 27 नवंबर को दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में किसान नेता भोपाल सिंह चौधरी ने देवदार संरक्षण का मुद्दा उठाकर लोगों को हर्षिल पहुंचने और पेड़ों पर रक्षासूत्र बांधने का आह्वान किया। पिछले रविवार को हुए आयोजन में स्थानीय ग्रामीणों के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता भी शामिल हुए थे। इससे पहले भी दो बार हर्षिल क्षेत्र में सुरेश भाई के नेतृत्व में देवदार बचाओ आंदोलन चल चुका है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके की संवेदनशीलता और बार-बार आने वाली आपदाओं को देखते हुए 6 मीटर की मजबूत सड़क पर्याप्त है, लेकिन 10-11 मीटर तक के विस्तार का औचित्य समझ से परे है। 5 अगस्त की खीर गंगा, तिल गाड़, भेला गाड़, लोध गाड़ व लेमचा घाट की आपदा का उदाहरण देते हुए लोगों ने कहा कि भारी जलसैलाब के बीच देवदार के पेड़ों ने ही कई जगह बड़ी तबाहियों को रोका था। बावजूद सरकार द्वारा देवदार बचाने की स्पष्ट नीति न आने से संशय बना हुआ है।

विशेषज्ञों का कहना है कि गंगा के उद्गम क्षेत्र में देवदार के जंगल प्राकृतिक बांध की तरह काम करते हैं। ये भारी बारिश या बादल फटने पर मलबे को नीचे बहने से रोकते हैं। देवदार मिट्टी को बांधकर ढलानों को स्थिर रखते हैं। सड़क चौड़ीकरण से बड़े पैमाने पर देवदार काटे गए तो औली-हर्षिल-गंगोत्री क्षेत्र में भूस्खलन की आशंका कई गुना बढ़ जाएगी।

इस इको-सेंसिटिव जोन में गंगोत्री, धराली, मुखबा, हर्षिल, जादुंग, नलांग, भटवाड़ी, मनेरी, अगोड़ा, जादुंगा सहित कुल 89 गांव में आते हैं।

उत्तरकाशी से भैरोंघाटी तक गंगोत्री हाईवे का चौड़ीकरण अब 12 मीटर की जगह 11 मीटर होगा। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय का कहना है कि धराली आपदा को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। बीआरओ नदी की ओर से भी पुस्ता लगाकर सड़क बनाएगा। सामरिक और चारधाम यात्रा के लिए यह हाईवे महत्वपूर्ण है। 90 किमी के दायरे में चौड़ीकरण पांच चरणों में होगा।

सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के कमांडर राजकिशोर ने बताया कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव, बीआरओ के डीजी आदि वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में हाईवे के चौड़ीकरण को एक मीटर घटाने का निर्णय लिया गया है।

इसके बाद पांच चरणों में प्रस्तावित चरण एक में भैरोंघाटी से झाला, चार हीना से तेखला बाईपास निर्माण व पांच तेखला से चुंगीबड़ेथी टनल के पास तक चौड़ीकरण की समीक्षा की जा रही है। उन्होंने बताया कि उक्त चरणों में अब एलाइमेंट सहित डीपीआर में भी परिवर्तन संभव है। बताया कि कटिंग कम हो, जिससे कि नए भूस्खलन जोन का निर्माण न हो। इसके लिए नदी की तरफ से दीवार लगाकर भी सड़क का निर्माण किया जाएगा।

 

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