पांच मुख्यमंत्रियों की घोषणा /स्वीकृति, फिर भी संग्राहलय निर्माण कार्य उपेक्षित
पांच दशकों से संग्राहलय निर्माण का ख्वाब, ख्वाब ही रह गया पौड़ी में
पौड़ी । पौड़ी में एक ख्वाव के साकार होते में पांच दशक बीत जायेंगे, यह अकल्पनीय लगता है लेकिन सच है। यह हालात तब हैं जब पांच मुख्यमंत्री अब तक इस ख्वाब को पूरा करने की घोषणा भी कर चुके हैं।
ख्वाब है उत्तराखण्ड के इतिहास और संस्कृति के संरक्षण हेतु एक मण्डलीय संग्राहलय का । सरकारें आती हैं और पौड़ी के लिये इस संग्रहालय निर्माण का आश्वासन देकर चली जाती हैं। आती – जाती सरकारों के मुखिया घोषणाएं दर घोषणाएं करते हैं लेकिन रिजल्ट वही ढाक के तीन पात । ऐसी घनघोर उपेक्षा और टालमटोल वाली सरकारी कार्य संस्कृति के कारण पौड़ी के आम रहवासी अत्यधिक क्षुब्ध और खफा हैं। खफा लोग इस मामले में अपने जनप्रतिनिधियों से भी हैं जो सब कुछ होने के बाद अब इस मंडलीय संग्रहालय के लिये बजट स्वीकृत नहीं करा पा रहे हैं। खफा तो लोग अपने पर्यटन व संस्कृति मन्त्री से भी हैं जो यहीं के हैं मगर फिर भी उनका ध्यान इस ओर नहीं है। संग्राहलय के लिये सब कुछ होने का मतलब इसकी स्वीकृति व जमीन से लेकर संग्रहालय का आगणन तक सब पूर्ण हो चुका है । बस, पौड़ी वालों के लिये सरकारी बजट रिलीज होना गूलर का फूल बना है। हमारे प्रभावशाली सांसद इसे आसानी से करा सकते हैं लेकिन वे पौड़ी में अपने महत्वकांक्षी तारामंडल वाले प्रोजेक्ट पर ही फोकस लिये लगते हैं।
ऐसे हालात मे पौड़ी के बुद्धिजीवी लोगों और संस्कृति कर्मियों का नाराज होना स्वाभाविक है। प्रसिद्ध इतिहासकार व पुरातत्व विद् और जो इस संग्राहलय निर्माण समिति के संयोजक भी हैं पदमश्री डॉ० यशवन्त सिंह कठोच इस बात से क्षुब्ध और दुःखी हैं कि पांच मुख्यमन्त्री पिछले लगभग पांच दशकों से जिसकी घोषणा करते आ रहे हैं उसे अभी तक धरातल पर नहीं उतारा गया है। उत्तराखण्ड राज्य में सरकारों की इस कार्य संस्कृति के प्रति वे अत्यधिक नाराज दिखाई देते हैं। उनका कहना है कि सन् 1980 में उत्तर प्रदेश सरकार ने सर्वप्रथम पौड़ी में संग्रहालय की स्वीकृति दी थी। इसके लिये बजट भी स्वीकृत किया गया था । तब जमीन उपलब्ध न होने के कारण इस पर कार्य नहीं हो सका । इसके बाद पुनः उ0 प्र० सरकार के उत्तरांचल अनुभाग स०-9 ने अपने 12 अगस्त 2098 के पत्र में पौड़ी में संग्राहलय स्थापना की स्वीकृति दी । उस समय भी उपयुक्त स्थान न मिलने के कारण यह लटका रहा । हलाँकि उस समय कोषागार के निकट इसके लिये भूमि देखी गयी लेकिन बात आगे नहीं बढ़ पायी । उनका कहना है कि अब वर्ष 2015 में पुरानी जेल की 690 वर्ग मी० जमीन इस संग्रहालय निर्माण के लिये संस्कृति विभाग को हस्तान्तरित कर दी गयी है। लेकिन अभी तक अग्रिम कार्रवाई नहीं की गयी है।
आपको बताते चलें कि मा0 मुख्यमन्त्री की घोषणा सं0 438/2009 के अन्तर्गत पुराने जेल भवन के स्थल पर शासनादेश सं0 2076/बीस-4/2016-1;33/2011 के तहत वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली के नाम पर संग्राहलय निर्माण की स्वीकृति हुई थी।
इसके बाद संग्राहलय निर्माण हेतु प्रथम चरण के कार्यों के लिए शासनादेश सं0 207/-2-2011-3;12 -2009 दिनांक 15 फरवरी, 2011 के द्वारा प्रक्रियात्मक कार्यों हेतु 9.50 लाख रु0 की धनराशि प्राप्त हुई थी। कार्यदायी संस्था उत्तराखण्ड पेयजल निगम द्वारा संग्राहलय भवन के निर्माण में प्रक्रियात्मक कार्यों यथा आगणन, मृदा परीक्षण, ड्राइंग एवं डिजाइनिंग पर 3.537 लाख खर्च कर शेष धनराशि दिनांक 6 अगस्त, 2021 को वापस संस्कृति विभाग को प्रेषित कर दी गयी है।
उत्तराखण्ड पेयजल निगम, अस्थाई निर्माण इकाई के परियोजना प्रबन्धक द्वारा अपने पत्रांक सं0 610/जी0-6/44 दिनांक 6 जून, 2016 के द्वारा रु0 1000.66 लाख द्वितीय चरण का आगणन शासन को स्वीकृति हेतु प्रेषित किया गया था। इस पर आतिथि तक शासन द्वारा धन अवमुक्त नहीं किया गया है, जबकि जेल प्रशासन की भूमि संस्कृति विभाग को हस्तानान्तरण से लेकर अन्य औपचारिकताएं प्रशासन/ विभाग द्वारा पूरी कर दी गयी हैं।
इधर, नागरिक कल्याण एवं जागरूक विकास समिति पिछले कई वर्षों से संग्राहलय निर्माण की मांग करती आ रही है । समिति ने अनेक बार मुख्यमन्त्री को इसके लिये बजट स्वीकृत किये जाने हेतु ज्ञापन प्रेषित किया है। समिति की चेतावनी है कि यदि शीघ्र बजट स्वीकृत कर इस पर कार्य शुरू नहीं किया गया तो उसे आन्दोलन के लिये बाध्य होना पड़ेगा । समिति का कहना है कि पौड़ी गढ़वाल मण्डल का मुख्यालय है और गढ़वाल के सभी जनपदों का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए यह जरूरी और महत्वपूर्ण है कि यहाँ पर एक संग्राहलय की स्थापना कर गढ़वाल के समाज और संस्कृति से जुड़ी विभिन्न वस्तुओं को धरोहर के रूप में संरक्षित और सुरक्षित किया जाय।
पर्यटन विशेषज्ञ प्रशान्त नेगी ने कहा है कि पौड़ी में संग्राहलय निर्माण के साथ ही कलक्ट्रेट में विरासत भवन व तारामंडल आदि स्थापना के बाद पर्यटन गतिविधियों में निश्चित रूप से बढ़ोतरी देखने को मिलेगी । इससे लिये संग्राहलय निर्माण का कार्य यथाशीघ्र किये जाने की आवश्यकता है। उन्होंने पुराने जेल भवन में संग्रहालय स्थापना को शासन/सरकार का एक सराहनीय निर्णय बताया है। उन्होंने वीर चन्द्र सिंह गढवाली के नाम पर संग्राहलय का नामकरण किये जाने का भी स्वागत किया है।
(सभी फोटो इन्टरनेट से साभार)






