उत्तराखंड

कुजेणी तब…कहीं उन पर बेरोजगारों की हाय न लग जाय

अपने ही गिराते हैं नशेमन पे बिजलियाँ, गौरों ने आके फिर भी...

देहरादून में पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन करते बेरोजगार

1. सरकार ने जांच के लिये एसआईटी का गठन किया ।

2. हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में काम करेगी एसआईटी ।

3. सम्बन्धित परीक्षा केन्द्र पर तैनात सेक्टर मजिस्ट्रेट को निलम्बित  किया ।

4. उच्च शिक्षा विभाग ने असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन को निलम्बित किया ।

5. वेरोजगारों का एक गुट परीक्षा रद्द न करने के पक्ष में ।

 

पौडी । दिनांक 24 सितम्बर, 2025

कुछ लोग इस तरह भी अपने काम तमाम करते हैं,
पहले उम्मीद देते हैं, फिर उम्मीद पर पानी फेरते हैं।

कुछ ऐसा ही प्रदेश के बेरोजगारों के साथ हो रहा है। उन्हें उम्मीद की घुट्टी पिलाई जा रही है और जब उम्मीद हकीकत में बदलने का समय निकट होता है तो उम्मीद पर पानी फेरने का काम होने लगता है। लेकिन प्रदेश में कथित सख्त नकल विरोधी कानून लागू होने के बाद भी अगर पेपर लीक या सरकारी भाषा में पेपर आउट होने की घटना हो जाती है तो इसे सरकारी सिस्टम की नाकामयाबी न कहें तो और क्या कहें ?

अभी कुछ महीनों पहले ही सरकार बहादुर और उससे जुड़े तमाम जिम्मेदार यह अघाते नहीं थकते थे कि देश में पहला ऐसा नकल विरोधी कानून है कि अब इससे नकल माफिया या नकल करने वालों के हौसले पस्त हो जायेंगे और नकल करने /कराने से पहले वे सौ बार सोचेंगे । प्रदेश की जनता को यकीन हो गया था कि वाकई अब तो परीक्षा पारदर्शी तरीके से बिल्कुल गोपनीय ढंग से होने लगेगी । अब जनमानस को क्या पता था कि एक बार फिर सरकार के दामन पर जी हजूरी करने वाले अपने ही समर्थक छीटें डाल देंगे । इस बात की भनक तो सरकार या उसके अपने खुफिया तन्त्र को भी नहीं हुई कि अपने ही गिरायेंगे फिर नशेमन पे बिजलियां । अब हजूर क्या करियेगा । इस सख्त नकल विरोधी कानून की तो हवा ही निकल गयी। यह तो पन्चर हो गया है। अपराधियों के हौसले तो पस्त नहीं हुए उल्टे सरकार को ही इन्होंने फजीहत में डाल दिया।

अब जब ऐसा हो ही गया तो सरकार स्नातक स्तरीय परीक्षा में इसे पेपर लीक नहीं मान रही है। अब चाहे यूके एसएसएस सी के चेयरमैन हो या देहरादून के एसएसपी, चाहे सरकार में बैठे मन्त्री हो या विधायक सभी एक स्वर में ब्राइन्डिंग कर रहे हैं कि इसे पेपर लीक नहीं कहेंगे, पेपर आउट कहेंगे, वह भी महज तीन पेज । ठीक है इसे पेपर लीक न कह कर पेपर के तीन पेज आउट होना कहते हैं। तो क्या इतना होना भी नकल विरोधी कानून के दायरे से बाहर हो गया। अपराध तो अपनी जगह है। यह ठीक है कि कतिपय अपराधियों को दबोचने में सिस्टम सक्रिय दिखा । लेकिन वह स्कूल जहाँ से पेपर आउट हुआ उस की लापरवाही पर अब तक क्या करवाई हुई। स्कूल सन्देह के घेरे में है, यह तो स्पष्ट है लेकिन क्या यह मानते चले कि स्कूल की लापरवाही के खिलाफ करवाई भी सन्देह के घेरे में है। क्या यह इसलिये की इसमे किसी ऐसे व्यक्ति धर्मेन्द्र चौहान का नाम आ रहा है जो भाजपा का हरिद्वार जिले का मीडिया को – आर्डिनेटर है। सन्देह इसलिये भी है कि इस केन्द्र पर जब अन्य परीक्षा कक्षों में जैमर लगे हुए थे तो दो – तीन कक्ष ऐसे क्यों छोड़ दिये जिनमे जैमर की व्यवस्था नहीं की गयी। पेपर आउट करते वाला खालिद कक्ष स० नौ में बैठा था तो वहाँ क्यों जैमर नहीं था। बताते है कि उसने वाश रूम जाकर अपनी बहिन सबिया को पेपर के स्क्रीन शॉट भेजे जिसने टिहरी की एक असिस्टेंट  प्रोफेसर को ये प्रश्न हल करने के लिये भेजे । परिक्षार्थी पेपर अपने साथ वॉश रूम ले जाता है और वहाँ से स्क्रीन शॉट भेजता है तो क्या यह बिना मिली भगत के हो गया । वह परीक्षा कक्ष से पेपर बाहर कैसे ले गया और दूसरा उसके पास वहाँ मोबाइल कैसे पहुँच गया । अब इस परीक्षा केन्द्र संचालक के खिलाफ अभी तक करवाई न होना मामले को सन्देहास्पद बनाता है।                  

अब आपको एक वाकिया पेपर आउट होने या यूं कहें कि पेपर गलत खुलने का बताते हैं। कुछ साल पहले आपको याद होगा कि पौडी जनपद के नैनीडांडा ब्लाक नैनीडांडा इन्टर कॉलेज में परिषदीय परीक्षा शुरू होने के दूसरे दिन ही हिन्दी का गलत पेपर परिक्षार्थियों में बंट गया । मतलब यह की कक्षा दसवीं की परीक्षा में बारवीं का उसी विषय का पेपर बंट गया। पेपर कक्षा कक्ष से बाहर भी नहीं आया और केंद्र को कुछ समय बाद ही गलती का पता लग गया और पुनः सही पेपर आवंटित कर केंद्र पर परीक्षा हुयी। निश्चित ही परीक्षा में यह बडी लापरवाही थी और सजा मिलनी ही थी। विभाग ने शिकायत पर तत्काल कार्रवाई कर तीन व्यक्तियों केन्द्र प्रभारी, कस्टोडियन और परीक्षा प्रभारी को निलम्बित कर दिया। उस समय तो कोई तथाकथित सख्त कहा जाने वाला कानून नहीं बना था पर जो था उसी के हिसाब से एक्शन हो गया। तो अब सख्त कानून बनने के बाद ऐसी घनघोर लापरवाही में भी वह केन्द्र अब तक कार्रवाई से अछूता क्यों है? शासन ने अभी तक केन्द्र व्यवस्थापक के खिलाफ तो कारवाई नही की लेकिन वहाँ तैनात सेक्टर मजिस्ट्रेट को निलम्बित कर दिया । शासन के अनुसार परीक्षा केन्द्र पर तैनात सेक्टर मजिस्ट्रेट के०एन० तिवारी, परियोजना निदेशक, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण, हरिद्वार को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है। शासन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है और अग्रिम आदेशों तक आयुक्त, ग्राम्य विकास कार्यालय, पौड़ी से सम्बद्ध कर दिया गया है।

जब जांच में यह स्पष्ट हो गया कि हरिद्वार के आदर्श बाल सदन इटर कालेज, बहादुरपुर जट से पेपर लीक हुआ। लीक करने वाला मुख्य आरोपी खालिद पकड़ा गया । अभी तक गिरफ्तार आरोपियों में खालिद के अलावा उसनी बहन सबिया, पंकज गौर, हाकम सिंह, हिना और असिस्टेंट प्रोफेकर  सुमन शमिल हैं।  पुलिस   अभी भी उसके मो० फोन को तलाश रही है जिस से उसने पेपर बाहर भेजा । पुलिस जोच में इसे अहम कड़ी मान रही है।   

एसआईटी गठन का आदेश

इधर, प्रदेश भर में पेपर लीक कांड के खिलाफ अनेक शहरों में बेरोजगारों का धरना प्रदर्शन जारी है। बेरोजगारों के साथ अन्य अनेक संगठन भी उनकी मांग के समर्थन में आगे आये हैं।  प्रदेश  बेरोजगार संघ सी० बी० आई० की मांग पर अड़ा है लेकिन सरकार अपने ही स्तर पर जांच कर दोषियों को सजा दिलाना चाहती है। शासन ने इसके लिये एक रिटायर्ड जज की निगरानी में एसआईटी का गठन कर दिया है। बेरोजगार संगठन के अध्यक्ष राम कंडवाल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मण्डल ने मुख्यमंत्री धामी से मिलकर परीक्षा निरस्त करने, व सीबीआई जांच सम्बन्धी मांगे रखी। जबकि दूसरी ओर, संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा छात्र संघ के प्रतिनिधिमंडल ने भी मुख्य मन्त्री से मिलकर उन्हें बताया कि परीक्षा निष्पक्ष रही और इसे परीक्षा कैंसिल नहीं की जाय। शीघ्र परीक्षा परिणाम जारी किये जांय । अब इतने बड़े बबाल के बाद भी दूसरा सरकार समर्थक संगठन कहाँ से खड़ा हुआ अधिकांश बेरोजगार इससे अंजान ही हैं।

बेरोजगार युवाओं का गुस्सा शांत करने और उनमें विश्वास बहाली को लेकर सरकार भले ही कार्रवाई का भरोसा दिला रही हो लेकिन हालात बिल्कुल उलट हैं। बेरोजागार पेपर चोर गद्दी छोड़ का नारा बुलन्द कर रहे हैं। एसआईटी का गठन और एक महीने में जांच रिपोर्ट आने, सेक्टर मजिस्ट्रेट के खिलाफ कार्रवाई, अब तक 6 गिरफ्तारियां, असिस्टेंट प्रोफेसर सुमत का निलम्बन आदि कार्रवाईयाँ होने के बाद भी बेरोजागार सी० बी० आई० जांच करने, स्नातक स्तरीय परीक्षा निरस्त कर एक माह में पुनः परीक्षा आयोजित करने, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग अध्यक्ष का इस्तीफा और आरक्षी भर्ती नियमावली में संशोधन करने की मांग कर रहे हैं। बेरोजगारों को यह भी सन्देह है कि इसमें बड़े मगरमच्छ भी शामिल हो सकते हैं। उनका आरोप है कि सरकार सीबीआई जांच की मांग न मान कर उन्हें बचाने का प्रयास कर रही है। उनका कहना है कि हाकम सिंह के दोस्त पंकज गौड़ का जो वीडियो वॉयरल हुआ उससे स्पष्ट है कि साजिश बडे  स्तर की है। जिस विश्वास के साथ वॉयरल वीडियो में 15 लाख में सेटिंग हो रही है उससे स्पष्ट है कि बात केवल निचले स्तर तक की नहीं । तो क्या ऐसे बड़े सफेदपोशों को बचाने के लिये सरकार सीबीआई जांच से कन्नी काट रही है। बेरोजागरों का यह भी आरोप है कि उत्तराखण्ड बनने के बाद से तमाम भर्ती परीक्षाओं में धांधलियां हुई हैं और इन सब की जांच होती चाहिए ।

इधर, पेपर लीक प्रकरण पर शासन की ओर से मुख्य सचिव आनन्द वर्द्धन ने मीडिया से वार्ता करते हुए कहा कि सरकार के लिए परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और शुचिता के साथ ही अभ्यर्थियों का हित सर्वोपरि है। इसी क्रम में गत रविवार को सम्पन्न परीक्षा में सामने आई शिकायतों की जांच एडिशनल एसपी स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में गठित एसआईटी द्वारा कराई जाएगी। उक्त एसआईटी का कार्यक्षेत्र पूरा प्रदेश होगा। मुख्य सचिव ने कहा कि जांच निष्पक्ष ढंग से हो इसके लिए यह भी एसआईटी जांच की निगरानी हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज के द्वारा की जाएगी। सेवानिवृत्त जज और एसआईटी सभी जिलों में जाएंगे, इस दौरान कोई भी व्यक्ति उन तक परीक्षा से संबंधित तथ्य और सूचना दे सकता है। उन्होंने बताया कि जांच एक माह में सम्पन्न की जाएगी, तब तक के लिए उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ओर से परीक्षा के संबंध में आगे कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि एसआईटी जांच में दोषी व्यक्ति के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हो इसके लिए भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। साथ ही विवादों के केंद्र में स्थित हरिद्वार के परीक्षा केंद्र पर जिस भी व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है, उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार के लिए छात्रों का हित सबसे ऊपर है। साथ ही यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि छात्रों और आमजन का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा बना रहे।

अब सरकार और बेरोजगार संगठन के साथ मिलकर तमाम अन्य संगठन दोनों ओर से जोर अजमाइश में लगे हैं। बेरोजगारों का अपना पक्ष व तर्क हैं तो सरकार और शासन अपनी तरह से काम कर रहे हैं। अब आगे यह देखना दिलचस्प होगा कि बेरोजगारों की अपनी हक की यह लड़ाई इस बार किस मुकाम तक पहुंचती है। सरकार को चाहिए की बेरोजगारों की बातें गम्भीरता से सुने और भविष्य में परीक्षा गोपनीय व पारदर्शी तरीके से हो इसके पुख्ता इंतजाम करे । साथ ही यह भी सुनिश्चित करे कि इस प्रकरण में संलिप्त कोई भी बड़ा व्यक्ति बच न पाये । चाहे इसके लिये फिर सरकार को सीबीआई जांच ही क्यों न करानी पड़े।

=बिमल नेगी

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