पौड़ी । दिनांक 9 दिसम्बर, 2025
पौड़ी में योजनाएं शायद दम तोड़ने के लिये ही बनती हैं। अधिकारी आते हैं, जाते हैं और अपने मन की कर गुजरते हैं लेकिन उनके पूर्ववर्ती अधिकारियों की अच्छी योजनाओं पर ध्यान न देकर उन्हें दम तोड़ने के लिये छोड़ जाते हैं ।
इसी तरह पौड़ी नगर में पिछले तीन चार सालों से एक बेहद खुबसूरत योजना दम तोड़ती नजर आती है। योजना है कण्डोलिया – टेका चेरी ब्लासम के पेड़ों से नगर की खिले गुलाबी पौधों से खुबसूरती बढ़ा कर पर्यटन को बढ़ावा देने की ।
यह योजना जिस धूम – धड़ाके से शुरु की गयी उतनी ही चुपके – चुपके अन्तिम सांसे गिनती नजर आती है। यह अलग बात है कि कुदरतन चेरी ब्लासम के कुछ पौधे इस योजना के शुरू होने की कहानी बयां करते नजर आते हैं।

कंडोलिया से टेका व ल्वाली मोटरमार्ग इन सर्दियों पौड़ी के अधिकांश लोगों के लिये सांयकालीन धूप सेकने का खुबसूरत स्पॉट है। पौड़ी नगर में आजकल लगभग तीन बजे तक धूप गायब हो जाती है। नगर के अधिकांश बुजुर्ग तीन बजे बाद घाम तापने इन्हीं मार्गो पर घूमते नजर आते हैं। इन मार्गो पर और खासकर टेका मार्ग पर आजकल खूब चहल पहल देखी जा सकती है। यही नहीं यहां से सूर्यास्त का नजारा भी देखने लायक होता है। यहां से एक बेहतरीन विंटर लाइन के दर्शन होते हैं जो अन्यत्र से कम ही दिखाई देती है। यदि चेरी ब्लासम के पेड़ यहाँ अपनी गुलाबी सुन्दरता बिखेरने लगते तो नजारे कुछ और ही नजर आते। 
पूर्व जिलाधिकारी धीरज गर्ब्याल की टेका मार्ग पर चेरी ब्लासम की यह योजना यदि धरातल पर उतरती तो यह स्थान सर्दियों में सांयकालीन एक बेहतरीन पिकनिक स्पॉट के रूप में विकसित हो सकता था । वैसे भी पौड़ी जिला प्रशासन द्वारा यह पहल शहर में पर्यटन को बढ़ावा देने और इसे ‘गुलाबी हिल स्टेशन’ के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से की गई थी। कण्डोलिया – टेका मार्ग की सौंदर्यीकरण की योजना 2021 में शुरू हुई थी। इस योजना के पहले चरण में कंडोलिया से टेका जाने वाले लगभग 2 किलोमीटर मोटर मार्ग के साथ चेरी ब्लॉसम के पौधे लगाए गए थे, जिसे बाद में 6 किलोमीटर तक बढ़ाने की योजना थी।
इस योजना का उद्देश्य जापान और शिलांग की तर्ज पर पौड़ी में भी चेरी ब्लॉसम के मनमोहक दृश्य तैयार करना था। जिससे पर्यटकों को आकर्षित किया जाता। पहले चरण में 300 चेरी ब्लासम के पौधे प्लान्ट किये गये थे। जिन्हें जम्मू कश्मीर के श्रीनगर से मंगाया गया था। बताया तो यह गया था कि यहां मेपल (चिनार) के पौधे लगाने की भी योजना थी। 
अब चार साल हो चुके इस योजना के धरातलीय अवलोकन से पता चलता है कि चेरी ब्लासम के अधिकांश पेड़ दम तोड़ चुके हैं। अभी कुछ नजर आ रहे हैं लेकिन उनकी ग्रोथ भी वैसी नही है जैसी होनी चाहिए थी। कई पेड़ अभी भी ट्री गार्ड के अन्दर हैं इनमें कतिपय सूख गये हैं, कई सूखने की स्थिति में हैं और कुछ एक हैं जो हरे तो हैं लेकिन बेहतर स्थिति में नहीं दिखते । इन पौधों की देखरेख न होना या देखरेख में लापरवाही होना स्पष्ट दिखता है। कुछ ट्री गार्ड पर तो अभी भी रोपित करने वालों के नाम पट्टी हैं।
तो क्या इस महत्वकांक्षी व महत्वपूर्ण योजना को धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी किसी विभाग के पास नहीं थी ? और थी तो ऐसी स्थिति क्यों आयी? क्या वर्तमान प्रशासन को इस योजना को दम तोड़ते ही देखना चाहिए या जिम्मेदार दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करी चाहिए।
निश्चित रूप से पौड़ी को सजाने संवारने और खुबसूरत बनाने के लिये यह एक बेहतरीन योजना थी। एक अच्छी पहल इस तरह दम तोड़ लेगी यह दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन पौड़ी के हम सभी निवासियों की भी यह जिम्मेदारी थी कि हम इस मामले में प्रशासन को आगाह करते, जो हम नहीं कर पाये हैं। लेकिन अभी भी जो पेड़ बचे हैं उन्हें सही ढंग से पोषित किया जाय तो बचे खुचे कुछ पौधे हस रोड की खुबसूरती पा चार चांद लगा सकते हैं।
= बिमल नेगी



