उत्तराखंड

ईडी के शिकंजे में पूर्व मन्त्री डॉ० हरक सिंह रावत

विशेष मनी लॉड्रिंग अदालत में डॉ० रावत समेत पांच के खिलाफ आरोप पत्र दायर

देहरादून । उत्तराखण्ड के पूर्व मन्त्री व दिग्गज कांग्रेसी नेता डॉ० हरक सिंह रावत एक बार फिर मुश्किल में फंसे हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने पूर्व मन्त्री डॉ० हरक सिंह रावत समेत पांच के खिलाफ मनी लांड्रिंग के मामले में देहरादून की विशेष मनी लॉन्ड्रिंग निवारण (PMLA) अदालत में आरोप पत्र दायर किया है ।

इस आरोप पत्र में हरक सिंह के साथ ही उनकी पत्नी दीप्ति रावत, उनके निकटतम सहयोगी लक्ष्मी राणा, वीरेन्द्र कण्डारी और पूर्णा देवी मेमोरियल ट्रस्ट के नाम शामिल हैं। हलाँकि हरक सिंह रावत सहित ये सभी आरोपी इन आरोपों को बेबुनियाद बता कर शुरू से ही खारिज कर रहे हैं । लेकिन अब जबकि आरोप पत्र अदालत में दाखिल हो चुका है तो इन सभी की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है ।,

बताया जा रहा है कि हरक सिंह रावत और उनके उक्त करीबियों पर जांच ऐजेन्सियाँ लम्बे समय से नजरें बनायी हैं और उनकी कथित अकूत सम्पत्ति की जांच कर रही हैं। इन करीबियों की आय से अधिक सम्पत्ति को लेकर नोटिस भी जारी हो चुके हैं। इन करीबी आरोपियों ने कम समय में ही कथित अकूत सम्पत्ति कैसे जोड़ी है ? जांच ऐजेंसियाँ इस बात की भी जॉच कर रही हैं। इनकी बेनामी सम्पत्ति और प्रतिष्ठानों की भी जांच होने की संभावना जताई जा रही है।

डॉ० हरक सिंह रावत इस पूरे प्रकरण को उन्हें और उनके करीबियों को परेशान करने की नीयत से विपक्षी साजिश बता रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि जब जब चुनाव आते हैं, उस समय उनके विरोधियों की सक्रियता बढ़ जाती है और वे जांच ऐजेन्सियों का दुरपयोग उनके खिलाफ करने लगते हैं।

इससे पूर्व, डॉ० रावत 2017 में भाजपा की त्रिवेंद्र सरकार में वन मंत्री रहे । इस कार्यकाल में उनके खिलाफ कार्बेट टाइगर रिजर्व में अनधिकृत रूप से पेड़ कटवाने के भी आरोप लगे हैं। ज्ञात हो कि कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत की सहसपुर क्षेत्र में 70 करोड़ रुपए की करीब 101 बीघा भूमि को जनवरी में अटैच कर दिया गया था। हलाँकि बाद में इस मामले में उन्हें उच्च न्यायालय से कुछ राहत भी मिली । ईडी ने इस मामले की जांच सहसपुर थाने में दर्ज धोखाधड़ी और जालसाजी के मुकदमे में शुरू की थी।

यह भूमि हरक सिंह रावत की पत्नी दीप्ति रावत और उनकी करीबी लक्ष्मी राणा के नाम पर खरीदी गई थी। जिस पर पर श्रीमती पूर्णा देवी मेमोरियल ट्रस्ट के तहत दून इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस का निर्माण किया गया। इस इंस्टीट्यूट का संचालन हरक सिंह रावत के पुत्र तुषित रावत के पास है।

ईडी इससे पूर्व डॉ० हरक सिंह रावत से सहसपुर जमीन के बारे में कई घन्टे पूछताछ कर चुकी है। ईडी कार्बेट टाइगर रिजर्व मामले में भी उनसे पहले ही पूछताछ कर चुकी है। इस मामले में उनसे तमाम दस्तावेज भी लिए गए हैं। हरक सिंह रावत ही नहीं बल्कि उनकी बहू अनुकृति गुसाईं रावत, उनकी पत्नी सहित परिजनों को भी ईडी अपने दफ्तर में पूछताछ के लिए बुला चुकी है। साथ ही उनके कुछ करीबियों से भी पूछताछ हुई है।

डॉ० रावत का कहना है कि उनकी लोकप्रियता से बौखला कर उनके विरोधी लगातार उन्हें साजिशों को शिकार बनाते रहे हैं। इससे पूर्व वर्ष 2004 मै जेनी प्रकरण सहित उनके खिलाफ कई साजिशें हुई हैं और  वह बेदाग होकर बाहर निकले हैं। उन्हें विश्वास है कि इस बार भी वे अपने विरोधियों को मुँहतोड जबाब देगे । उनका यह भी कहना है कि यदि उनके खिलाफ कार्रवाई हुई तो वे चुप नहीं बैठेंगे और कई अन्य बड़े बड़ो को बेनकाब कर देंगे । अब हरक सिह रावत चाहे जो कहें लेकिन विरोधियों को लगता है कि इस बार उनका बच पाना मुश्किल है। लेकिन राजनीति के अनुभवी खिलाड़ी डॉ० रावत कैसे खुद को निर्दोष साबित करते हैं, यह तो आने वाला वक्त ही बतायेगा ।

     मौजूदा समय में हरक सिंह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं। वे लगातार भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर बयानबाजी कर रहे हैं। पंचायत चुनाव के समय की गई ईडी की कार्रवाई से राजीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गयी है। है।

 

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