साहित्य व संस्कृति

सृजनधर्मिता के लिये डॉ० उमेश चमोला को हिमवन्त साहित्य सम्मान

प्रसिद्ध कवि चन्द्र कुंवर बर्त्वाल की स्मृति में प्रतिवर्ष दिया जाता है हिमवन्त साहित्य सम्मान

डॉ० चमोला को सम्मानित होते हुए ।

रुद्रप्रयाग । हिन्दी और गढ़वाली में अब तक विभिन्न विषयों व विधाओं में 22 से अधिक पुस्तकों का सृजन करने वाले वरि० सहित्यकार डॉ० उमेश चमोला को प्रसिद्ध कवि चन्द्र कुंवर बर्त्वाल की स्मृति में हिमवन्त साहित्य सम्मान से सम्मानित किया गया।

        उन्हें यह सम्मान कवि चन्द्र कुंवर बर्त्वाल सांस्कृतिक मेला और उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी अवतार सिंह राणा स्मृति समारोह में अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज अगस्त्यमुनी में आयोजित एक कार्यक्रम में दिया गया । इस कार्यक्रम में साहित्यकार डॉ. उमेश चमोला को  हिमवंत साहित्य सम्मान और राज्य आंदोलनकारी विजय सिंह राणा को अवतार सिंह राणा स्मृति सम्मान केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल के हाथों दिया गया।

          समारोह में विधायक आशा नौटियाल ने कहा कि चंद्र कुंवर बर्त्वाल के जीवन से हमें सीख मिलती है कि जीवन की विकट परिस्थितियों में भी हम अपनी इच्छा शक्ति के बल पर महत्वपूर्ण कार्य कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि पंवालिया में कवि बर्त्वाल के पैतृक भवन को संग्रहालय के रूप में विकसित किया जाएगा। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रो. के. सी. दुदपुड़ी प्राचार्य राजकीय महा विद्यालय अगस्त्यमुनि ने कहा कि युवाओं को उनके साहित्य का अध्ययन कर उस पर चिंतन करना चाहिए। उन्होंने बर्त्वाल के साहित्य को पाठ्यक्रम में शामिल करने की आवश्यकता भी व्यक्त की। कार्यक्रम संयोजक संजय सजवाण प्रधानाचार्य अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज अगस्त्यमुनि ने कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए आशा व्यक्त की यह कार्यक्रम बच्चों को सीखने को प्रेरित करेगा।

 

साहित्यकार डॉ. उमेश चमोला ने अंग्रेजी के शोक गीतकारों (Elegy Writer ) टामस ग्रे, पी. बी. शैली और जॉन मिल्टन की कविताओं की पंक्तियों को उद्धरित करते हुए उनकी चंद्र कुंवर बर्त्वाल की कविताओं से तुलना करते हुए कहा कि बर्त्वाल की कविताओं में यमराज से सीधा संवाद है। उनकी कविताओं में अनोखा बिम्ब विधान देखने को मिलता है। विजय सिंह राणा ने कहा कि उन्हें दिया गया सम्मान उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के रूप में जनता का सम्मान है। चंद्र कुंवरबर्त्वाल शोध संस्थान के अध्यक्ष हरीश गुसाईं ने कहा कि शोध संस्थान का उद्देश्य चंद्र कुंवर बर्त्वाल के साहित्य को जन जन तक पहुंचाना है। बच्चों की रचनात्मकता को बढ़ाने के लिए बर्त्वाल की कविताओं का वाचन, कविता पोस्टर और बर्त्वाल के जीवन और साहित्य पर आधारित प्रश्नोत्तरी से संबंधित प्रतियोगिता रखी गई हैं।

        इस अवसर पर बाबा केदारनाथ दास सेवा मंडल के अध्यक्ष चंद्र सिंह नेगी के सहयोग से रुद्राक्ष के पौधे का रोपण किया गया। कार्यक्रम का संचालन कुसुम भट्ट ने किया। इस अवसर पर साहित्यकार वृजमोहन भट्ट, पत्रकार अनुसूया प्रसाद मलासी, दीपक बेंजवाल, सुधीर बर्त्वाल, गंभीर सिंह बर्त्वाल, गिरीश बेंजवाल, डॉ. डी. एस. बिष्ट, हिमांशु भट्ट, उमा केंतुरा, सुंदर सिंह राणा, हर्ष वर्धन राणा, मनोज राणा, सुमन जमलोकी, दमयंती भट्ट आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम में कविता पोस्टर प्रदर्शनी और कविता की सस्वर प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रहे।

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