कामयाबी की गाथा : पौड़ी की रामलीला : इस साल 22 सितम्बर से
श्री रामचन्द्र कृपाल भज मन, हरण भव भय दारुणम्

पौड़ी । आयुषि नेगी । पौड़ी रामलीला में माँ सीता की किरदार । आयुषि का सीता का अभिनय करते हुए यह दूसरा साल है। यहां स्थानीय कैम्पस में एमएससी जूलॉजी की छात्रा है आयुषि । सीता के इस अहम किरदार का अभिमंचन हेतु पूरी तरह तैयार आयुषि रिहर्सल के दौरान अत्यधिक उत्साहित नजर आती हैं। बात करने पर कहती हैं कि सम्पूर्ण रामलीला के दौरान कैसा फील होता है, बयां नहीं कर सकती परन्तु कुछ तो है जो मुझे इस दौरान अभिप्रेरित किये रहता है।
रामलीला पौड़ी के मंच पर यह अभिप्रेरणा केवल अदिति के मन में नहीं, रामलीला पौड़ी से जुड़े छोटे से बडे कलाकार व संगीतज्ञ से लेकर छोटी बड़ी व्यवस्थाएं सम्भाल रहे हर व्यक्ति के मन में नजर आती है। अब निहारिका को ही ले लीजिए । कक्षा पांच में पढ़ती है । रामलीला में उसको गौरी माँ का अभिनय करना है। बड़ी सरलता और सहजता से कहती है कि सखी सहेलियाँ भी हैं । हम कर लेगी ।
पौड़ी रामलीला की रिहर्सल का लगभग समापन है। हारमोनियम पर सदाबहार बेहतरीन हुनरमंद कलाकार व पौड़ी रामलीला के भीष्म गौरीशंकर थपलियाल बैठे हैं । सामने हैं दशरथ का किरदार अदा कर रहे डॉ० मदन मोहन नौडियाल । पौड़ी रामलीला के हनुमान के रूप में पहचान बनाये हैं लेकिन बार पहली मर्तबा दशरथ की भूमिका में हैं। डॉ० नौडियाल सहजता से अभिनय करते दिखाई दे रहे हैं । सामने कैकई के रोल में प्रॉक्सी सोनम डोभाल हैं (उक्त चिन्न में)। तालीम दे रहे गौरीशंकर हारमोनियम छोड़कर स्वयं उन्हें इस किरदार के अभिनय की बारीकियों का समझाते नजर आते हैं
दृश्य बदलता है। हारमोनियम पर रामलीला के संगीत निर्देशक मनोज रावत ‘अंजुल’ नजर आते हैं । उनके साथ तबला और ढोलक पर शार्दुल, पवन पुरोहित और अंशुमन बैठे हैं। सामने बिभीषण की भूमिका में रिहर्सल करते इन्द्रमोहन चमोली है। इन्द्रमोहन स्वयं संगीत सह निर्देशक हैं । उनके अभ्यास के दौरान अभिनय में उतार चढ़ाव को लेकर चर्चा होती है लेकिन बिभीषण का किरदार अनुभवी है इसलिये अधिक जुवानी खर्च की बचत होती है।
एक – दो दिन रामलीला रिहर्सल में जाने पर अन्य कई पात्रों को तालीम लेते हुए मंच पर देखा । इन किरदारों में रावण की भूमिका में जगतकिशोर बड़थ्वाल, राम का अभिनय करते हुए गौरव, लक्ष्मण के रौल में सुनील तीनों का बेहतरीन अभिनय देखने को मिला । परसुराम का सुन्दर किरदार समेटे हुए हिमांशु चौहान ‘ छुनकी’ को देखा तो ताड़का की सजीव भूमिका में नीरज को भी देखा । अन्य कलाकारों में पारस, अंशुमन, राहुल, अंकित, गिरीश, कृष, प्रज्जवल, साहिल, गोपाल व गौतम आदि कलाकारों का तालीम में उत्साह से प्रतिभाग करते दिखायी दिये। जनक के किरदार में आसुतोष नैथानी, वशिष्ठ की भूमिका में अनिल नैथानी तथा अन्य छोटी लेकिन महत्वपूर्ण अदाओं में नवीन नैथानी, वीरेन्द्र जदली व प्रदीप कण्डारी आदि की भूमिकाएं भी मंच पर परखने को मिलेंगी ।
पौड़ी रामलीला के रिहर्सल में महिला पात्रों के अपने अभिनय के प्रति दिखायी दे रहे भावनात्मक जुड़ाव उनके अभिनय को और अधिक संजीदगी प्रदान करता नजर आता है। महिला पात्रों को पौड़ी रामलीला में पहली बार वर्ष 2002 में शामिल किया गया था। तब से लड़कियाँ व महिलाएं रामलीला में बढ़चढ़ कर प्रतिभाग कर रही हैं । वह इस समय भी रिहर्सल में दिखायी दिया । अब चाहे कैकई की भूमिका में सुहानी नौटियाल हों, कौशल्या के किरदार में आरती बहुगुणा हों या फिर सूपर्णखा के रौल में मानवी थपलियाल, सभी मंच पर बेहतरीन अभिनय प्रस्तुत करने हेतु अभ्यास में जुटी दिखायी देती हैं। सुमित्रा – दीपिका चौहान, मन्दोदरी – समीक्षा चौहान, सुलोचना – तनुप्रिया, सुनैना – प्रीति रावत, तारा – खुशी, मन्थरा – काशिश, अनुसूया – सोनम व पार्वती – अदिति के साथ सहयोग देती दीक्षा, वैभवी, सन्ध्या व सौम्या, खुशी नेगी आदि रिहर्सल करते हुए आगामी रामलीला के दृश्यों को अत्यधिक सजीव व प्रभावोत्पादक बनने हेतु प्रयासरत हैं। वास्तव में रिहर्सल में इस बात का अहसास होता है कि पौड़ी रामलीला की एक बड़ी ताकत इसके महिला पात्र हैं जो हर परिस्थिति को स्वयमानुकूल करने का प्रयास करती हैं।
पौड़ी रामलीला के बारे में कहा जाता है कि पौड़ी की रामलीला ने फीनिक्स पक्षी की तरह पुनर्जन्म लिया है। कहते हैं कि नब्बे के दशक में एक समय ऐसा आया जब दर्शकों का बिल्कुल अकाल पड़ गया था । वह लोगों का घरों में नये नये टेलीविजन सेट पर चिपकने का दौर था। लेकिन पौड़ी के कलाकारों व समिति से जुड़े लोगों के हौसले ने इस रामलीला को पुनर्जन्म ही नही दिया बल्कि आज शोहरत व कामयाबी के झण्डे गाड़ दिये । आज दर्शकों के लिहाज से ही नहीं संगीत व कला सहित तमाम पक्षों के सटीक प्रस्तुतीकरण ने पौड़ी की रामलीला को एक नई पहचान दी है। इसी नई पहचान व शोहरत की एक बानगी तब भी दिखाई दी जब वर्ष 2008 में पौड़ी की रामलीला का इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र दिल्ली में डॉक्युमेन्टेशन हुआ ।
पिछले डेढ़ महीने से चल रही रिहर्सल के इन अन्तिम दिनों में रामलीला के इस जटिल प्रबन्धन में श्री रामलीला मंचन एवं सांस्कृतिक समिति पौड़ी के तमाम पदाधिकारी, सदस्य व कलाकार समर्पित होकर कार्य निष्पादित करते दिखाई देते हैं। समिति के अध्यक्ष उमाचरण बड़थ्वाल मिलते ही उनकी व्यस्तता स्पष्ट दिखाई देती है । जैसे मूक होकर कह रहे हों – राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ विश्राम?
जी हाँ, हनुमान जी मैनाक पर्वत को हाथ से छूकर प्रणाम करते हैं (हनुमान तेहि परसा कर पुनि कीन्ह प्रनाम) और कहते हैं कि श्री राम का काम किए बिना उन्हें विश्राम नहीं मिल सकता है। यह हनुमान जी की दृढ़ भक्ति, कर्मनिष्ठा और अपने कर्तव्य के प्रति अटूट समर्पण को दर्शाता है। बिल्कुल ऐसा ही कर्मरत रहकर अभीष्ट सिद्धि का भाव रामलीला अभिमंचन शुरू होने के दो – तीन दिन पूर्व समिति से जुड़े तमाम सदस्यो व कार्यकर्ताओं में इन दिनो देखा जा रहा है। यहाँ किसी एक मोर्चे पर काम नहीं हो रहा है, जैसा हम समझते हैं कि कलाकारों को तालीम दी जा रही है। यहाँ तो अलग अलग लोगों ने अलग – अलग मोर्चे संभाल रखे हैं। मसलन रिहर्सल के दौरान रामलीला भवन के एक कक्ष में अनजाने ही प्रवेश कर गया तो देखा वहाँ रावण के पुतले का ढांचा बन रहा है। बताया गया कि एक टीम इसे डिजाइन करने में लगी है। एक अन्य कक्ष में जाने का मौका मिला तो वहाँ रामलीला की तमाम प्रॉप्रटीज को करीने से रखने का काम चल रहा है। रामलीला भवन से बाहर निकलने पर आर्थिक मोर्चे पर काम कर रही टीम से मुलाकात हो गयी। अब इतने लम्बे व भव्य मंचन के लिये आर्थिक पक्ष का मजबूत होना भी जरूरी है।
मगर रामलीला जैसे 11-12 दिवसीय यज्ञ के लिये इतना ही नहीं इसके अतिरिक्त भी संगीत पक्ष, नृत्य पक्ष, रिदम, पार्श्व गायन पक्ष, ध्वनि व प्रकाश व्यवस्था, दृश्य संयोजन, वस्त्र सज्जा, रूप सञ्जा व प्रचार प्रसार व्यवस्था, मंच व्यवस्था का मुक्कमल होना जरूरी है। फिर इस हाईटेक जमाने में कई दृश्य इस अनुरूप भी प्रस्तुत करने होते हैं। इन सब की तैयारियां भी जरूरी हैं। संगीत निर्देशक मनोज रावत ‘अंजुल’ का कहना है कि रिहर्सल की तैयारियाँ लगभग पूरी हो गयी हैं। नवोदित कलाकारो को स्व – अभ्यास भी जरूरी है और वे जरूर इस ओर ध्यान देंगे । समिति के अध्यक्ष उमाचरण बड़थ्वाल ने बताया कि रामलीला में जिसे भी जिम्मेदारी दी गयी है, सभी पूरी आस्था व कर्मठता के साथ उसे यथासमय पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने भगवान राम के आस्थावान सभी दर्शकों से अपील की है कि 22 सितम्बर से शुरू होने वाले इस रामलीला के 125 वें मंचन में प्रतिभाग कर कलाकारों व समिति का उत्साहवर्धन जरूर करें।
=बिमल नेगी
दिनांक : 20 सितम्बर, 2025



