उत्तराखंड

शराब जरूरी है जनाब : फिर चाहे उसे पुलिस सुरक्षा में बेचनी पड़े

ढालवाला में शराब की दुकान बन्द करने के लिये धरना - प्रदर्शन

दुकान खोलने हेतु पहरा देती पुलिस

पौड़ी । दिनांक 1 नवम्बर, 2025

ऋषिकेश ढालवाला की शराब की दुकान प्रदेश सरकार के लिये गले की फांस बनती जा रही है। इधर कुँआ – उधर खाई वाली बात सरकार के सामने खड़ी है। अर्थात दुकान बन्द करते हैं तो सालाना 21 करोड़ की चपत लगती है और नहीं करते हैं तो सरकार की फजीहत और बदनामी हो रही है। लगता है सरकार में त्वरित जनपक्षीय निर्णय लेने की क्षमता कम होती जा रही है अन्यथा पुलिस के पहरे में खोले जाने वाली यह शराब की दुकान पूरे देश के लिये इस तरह की मिशाल पेश नहीं करती ।

मुनी की रेती नगरपालिका क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाली यह अंग्रेजी शराब की दुकान कुछ दिन पहले तब चर्चाओं में आयी जब दुकान के नजदीक ही एक युवक की चाकू से गोद कर हत्या कर दी गयी। इस क्षेत्र के लोगों में तब से ही शराब की दुकान के खिलाफ आक्रोश है और इसके लिये पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से यहाँ आदोलनकारियों द्वारा धरना प्रदर्शन किया रहा है। इतना ही नहीं, स्थानीय महिलाएं शुरुआत में यहां दुकान का विरोध कर चुकी हैं, अब मुनि की रेती नगर पालिका ने भी शराब की ये दुकान बंद करने का प्रस्ताव पारित कर दिया.

ज्ञात हो कि यह शराब की दुकान मुनि की रेती नगरपालिका क्षेत्र के अंतर्गत आती है और तीर्थ क्षेत्र होने के कारण इस शराब की दुकान का विरोध पहले से ही हो रहा है. आरोप है कि यह दुकान वन भूमि में बनी है और आदोलनकारी इसकी जांच किये जाने की मांग भी कर रहे हैं।

ढालवाला में युवक की हत्या के बाद बंद शराब की दुकान को एक दिन पहले ही भारी पुलिस फोर्स तैनात करके खोला गया है। वहाँ दुकान के बाहर धरना दे रहे लोगों को वहाँ से जबरन हटाया गया है । आन्दोलनकारियों को दुकान के निकट फटकने नहीं दिया जा रहा है। वे दूर बैठकर अब धरना दे रहे हैं। दुकान के इर्दगिर्द भारी पुलिस बल मुस्तैद है और उन्हीं की निगहबानी मै शराब बिक रही है।

इधर, आबकारी आयुक्त अनुराधा पाल का कहना है कि दुकान का वहां की घटना से कोई लेना-देना नहीं है । ये प्रायोजित आंदोलन किए जा रहे हैं । आबकारी आयुक्त का कहना है कि हाईकोर्ट ने भी निर्देश दिए हैं कि दुकान को खोला जाए और किसी को भी कोई प्रदर्शन करना है तो किसी दूसरी जगह करे ।

अब हालत यह हैं कि जनता इस दुकान के विरोध में लामबन्द होती जा रही है। सरकार दुकान खोलने पर अड़ी है। सरकार को लगता है कि धरम – करम अपनी जगह है मगर सरकार के लिये राजस्व भी अपनी जगह है । इसलिये पुलिस प्रशासन को सख्त हिदायत है कि दुकान हर हालत में खुलती चाहिए । नुकसान नहीं होता चाहिए । चर्चा और आरोप तो यहाँ तक हैं कि दुकान से प्रति वर्ष होने वाली लगभग 21 करोड़ की कमाई और कुछ नेताओ की दुकान खोले रखने में व्यक्तिगत रुचि के कारण सरकार दबाब में है । इसलिये सरकार जनपक्षीय फैसला नहीं ले पा रही है। परन्तु ऐसा भी हो सकता है कि आंदोलन की आंच तेज होने पर बेरोजगारों के आंदोलन की तरह सरकार को पुनः अपना निर्णय बदलने हेत मजबूर होना पड़े ।

तीर्थ क्षेत्रों की पवित्रता बनाये रखने के लिये यह जरूरी है कि इन क्षेत्रों में शराब की दुकानें न खोली जांय । सरकार को इस पर गम्भीरता से विचार करते हुए जनभावनाओं का सम्मान करना चाहिए।

सरकार को विचार करना चाहिए कि आन्दोलनकारियों के आरोप गलत हो सकते हैं परन्तु तीर्थ क्षेत्र में शराब की दुकान न खोले जाने की बात कभी गलत नहीं हो सकती ।

 

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