विधायक निधि से 15 प्रतिशत कमीशन आखिर क्यों काट रहे हैं अधिकारी
सदन में प्रतिपक्षी विधायक दल के उपनेता का वक्तव्य वायरल
पौड़ी । 4 नवम्बर, 2025
उत्तराखण्ड राज्य स्थापना की रजत जयन्ती पर पूरे प्रदेश में और खासकर देहरादून में कुछ खास लोगों के लिये गहमागहमी का माहौल है। दो दिवसीय विधानसभा का विशेष सत्र भी चल रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्म ने इस विशेष सत्र को संबोधित कर उत्तराखण्ड को गौरवान्वित किया है। परन्तु इसी विधानसभा सत्र में कांग्रेस विधायक दल के उपनेता और खटीमा के विधायक भुवन कापड़ी ने सदन में विधायक निधि में 15 प्रतिशत कमीशन काटे जाने के बयान ने पूरे उत्तराखण्ड में सनसनी मचा दी है। उनका सदन मे दिया यह वक्तव्य सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है।
राज्य स्थापना की रजत जयन्ती समारोह को यादगार बनाने के लिये सरकार ने एक नवम्बर से ग्यारह नवम्बर तक देहरादून के साथ ही पूरे प्रदेश में अनेकानेक आयोजनों की सिलसिलेवार रूपरेखा प्रस्तुत की है। इन 25 सालों में जहाँ विकास हुआ और जिनका विकास हुआ, वे सब सरकार के साथ हर्षोल्लास में डूबे हैं। सरकार के साथ सभी लोगों को अपने प्रदेश की स्थापना के 25 वर्ष होने पर बेशक खुश होने का अधिकार व अवसर भी है । लेकिन इस एक बयान ने रजत जयन्ती के खुशगवार रंगों को बदरंग बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। कहते हैं ना कि प्रवाह के विपरीत बहने वालो पर सभी की नजर होती है। यहाँ भी कुछ यही हो रहा है। रजत जयंती पर प्रदेश की तस्वीर कुछ इस ढंग से प्रस्तुत हो रही है जैसे इन 25 सालो में प्रदेश ने विकास के कई नये आयाम स्थापित कर दिये हों । इन 25 वर्षों में बहुत कुछ हुआ भी है। इधर पटरी से उतरी स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ लोग आंदोलन कर रहे हैं वहीं हमारे मन्त्री बयान दे रहे हैं कि देश का यह पहला प्रदेश है जहाँ डॉक्टर मरीजों को ढूंढ रहे हैं और खोजने पर भी मरीज नहीं मिल रहे हैं। विकास के ऐसे कई आयाम इन 25 सालो में स्थापित हुए हैं। इन्हीं में एक सरकार को नापसन्द आने वाले भ्रष्टाचारी आयाम की चर्चा भुवन कापड़ी सहाब भी कर गये।
सदन के अन्दर कापड़ी जी स्पष्ट कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि ‘इन 25 सालो में भ्रष्टचार जवान हुआ है । हम भला करने वाले लोग यहाँ बैठे हैं। मैं कहना नहीं चाहता और कहूँगा तो आप बोलेंगे की भुवन कापड़ी ने क्या बात कह दी। हम जनता का क्या भला कर पायेंगे जब हमारी विधायक निधि से ही 15 – 15 प्रतिशत कमीशन इन अधिकारियों के माध्यम से काटा जा रहा है। तो हम क्या ईमानदारी की बात करेंगे। यहाँ पर आदरणीय नेता सदन बैठे हैं आप 15 प्रतिशत निकाल कर अधिकारियों को दे दीजिए फिर हमें विधायक निधि दीजिए ।’
रजत जयन्ती के अवसर पर सत्ता पक्ष ने प्रदेश की जो खुशहाल तस्वीर पेश की चाहे वह पूरी तरह सच न भी हो तो भी ऐसा समझ में थोड़ा – थोड़ा तो आ ही रहा था कि सब अच्छा ही अच्छा हो रहा है । और वास्तव में इन 25 सालों में प्रदेश ने कई क्षेत्रों में तरक्की भी की है। लेकिन सत्ता पक्ष के इस अतिरंजित सच के वजनी भार से भरे गुब्बारे पर विपक्ष के विधायक दल के उपनेता ने 15 प्रतिशत कमीशन की ऐसी सुई चुभोई कि जिसकी फुस्स होती हवा जनता से लेकर सत्ता के गलियारों तक अमिट छाप छोड़कर चर्चा का विषय बन गयी । अब विधायक जी तो वही बात बोल रहे हैं जिसे जनता पहले से जानती है। गलती केवल इतनी सी हुई है कि उन्हें सदन जैसे गरिमामय स्थान पर इससे परहेज रखना चाहिए था । सदन के रिकॉर्ड में यह बात आयी भी या नहीं यह तो सभा अध्यक्ष ही जाने पर बात जब निकली है तो सच्चाई सदन में बैठे विधायक गणों से अधिक कोई नहीं जानता है ।
= बिमल नेगी

