उत्तराखंड

गुलदार ही नहीं भालू भी बना पहाड़ में आतंक का सौदागर

प्रदेश के 13 वन प्रभागों में भालू के हमले तेज हुए

भालुओं की शीत निद्रा (हाइबरनेशन) प्रक्रिया प्रभावित होने से हमले बढ़े हैं : रिपोर्ट

रुद्रप्रयाग जनपद में भालू का सर्वाधिक आतंक

मुख्यमंत्री धामी ने वन विभाग को दिये तत्काल कार्रवाई के निर्देश

पौड़ीः दिनांक : 25 नवम्बर, 2025

पहाड़ मे लोग आदमखोर गुलदार /बाघ के हमलों से दहशत में जी रहे हैं लेकिन पिछले दो – तीन महीनों से जिस तरह भालू के निशाने में पहाड़ के लोग आये हैं उसने यहाँ कोढ़ में खाज का काम किया है। 

प्रदेश के 13 वन प्रभागों में भालू के हमलों की घटनाएं हो चुकी हैं। इसमें सबसे अधिक मामले रुद्रप्रयाग, गढ़वाल और बदरीनाथ वन प्रभाग में सामने आए हैं। घटनाओं के मद्देनजर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वन विभाग को तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। परन्तु वन विभाग के पास भालू के हमलों को तत्काल रोकने या इन्हें कम करने की ऐसी कोई जादुई छड़ी नहीं कि इन्हें तत्काल रोका जा सके । हाँ जन-जागरूकता व कुछ अन्य प्रयासों से इन घटनाओं में कमी लायी जा सकती है।

इस साल प्रदेश में भालू के हमले में 69 लोग घायल हो चुके हैं, जबकि पांच लोगों की मौत हो चुकी है। इसमें गढ़वाल मंडल के नौ वन प्रभागों में 63 घटनाएं हुई हैं। जबकि कुुमाऊं मंडल में 11 घटनाएं हुई हैं। इसमें सबसे अधिक रुद्रप्रयाग(14), गढ़वाल (13) और बदरीनाथ वन प्रभाग में (12) घटनाएं हुई हैं। पिछले चार वर्षा की तुलना में इस साल अब तक कि उक्त घटनाएं सर्वाधिक हैं।

घटनाओं के मद्देनजर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वन विभाग को तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। वन मंत्री सुबोध उनियाल ने वनाधिकारियों से बातचीत के बार मानव- वन्यजीव संघर्ष रोकथाम के लिए निर्देश दिए। प्रमुख सचिव वन आरके सुधांशु ने बताया कि घटनाओं में कमी लाने के लिए निर्देश दिए हैं। इसके त्वरित कार्रवाई के साथ ही दीर्घकालिक उपाय करने के लिए भी कहा गया है। इसमें भालू के हाल के मूवमेंट को देखते हुए कैमरा ट्रैप में भालू की उपस्थिति व पगमार्क के आधार पर भालू की सक्रियता वाले क्षेत्रों की पहचान कर हॉट स्पाट चिह्नित करने को कहा गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में क्विक रिस्पांस टीम और अन्य टीम को पैदल गश्त करने का निर्देश दिया गया है।

वन विभाग मानव- वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए कार्य कर रहा है, उसकी एक्शन टेकन रिपोर्ट प्रतिदिन शासन को भेजने को कहा गया है। इसके अलावा वन विभाग ग्राम प्रधानों से संपर्क करने के साथ जन जागरूकता अभियान चलाने समेत अन्य कार्रवाई कर रहा है।

भारतीय वन्यजीव संस्थान ने जम्मू- कश्मीर में भालुओं पर अध्ययन किया था। सात भालुओं पर रेडियो कॉलर लगाया गया था। इस अध्ययन में पता चला था कि भालू औसतन 65 दिन शीत निद्रा में रहे। राज्य में भालू के हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं। इसके पीछे भालू के हाइबरनेशन (शीत निद्रा) जाने की प्रक्रिया प्रभावित होना भी एक कारण माना जा रहा है पर सभी भालू की शीत निद्रा एक जैसी नहीं होती है। कोई भालू तीन तो कोई डेढ़ महीने तक भी शीत निद्रा में रहता है। 

वन विभाग ने भी भालू पर अध्ययन किया था।  वर्ष-2018 में किये गये अध्ययन में देखा गया था कि भालू के हाइबरनेशन में जाने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। वह हाइबरनेशन में जाने की जगह साल भर एक्टिव रह रहा है। इसके पीछे कम बर्फबारी, फीडिंग बिहेवियर में बदलाव समेत अन्य कारण हो सकते हैं। 

पहाड़ में लगातार बढते गुलदार / बाघ व भालुओं के हमले से लोग दहशत में हैं। इससे पूरे पहाड़ में आज सैकड़ों गाँवों में करफ्यू जैसे हालात हैं। लोग अत्यधिक गुस्से में हैं। परन्तु सरकार के पास ऐसा कोई उपाय नहीं कि इनसे पहाड़ के लोगों की सुरक्षा कर सके।

 

 

 

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