पर्यटन

नाक के नीचे अपनी शाखा तो बचाए रखें हुजूर

जार्ज एवरेस्ट इस्टेट की लीज के टेण्डर में गड़बड़ियाँ

मसूरी में जार्ज एवरेस्ट का रिनोवेटेड घर

पौड़ी । जार्ज एवरेस्ट की मसूरी इस्टेट को लीज पर दिये जाने में हुई अनियमिता के आरोप अगर सही हैं तो यह सरकार के लिये बेहद गम्भीर और शर्मनाक है। वह इसलिये कि यह सारा खेल सरकार की नाक के नीचे हुआ है । जाहिर है जो आरोप हैं उनसे तो यही लगता है कि जिलों की बात छोड़िए, ऊपरी स्तर पर भी अधिकारी सरकार को सरलता से गुमराह कर रहे हैं और टेण्डर जैसे संवेदनशील मामले में भी पारदर्शिता न रखकर लापरवाही से कार्य कर रहे हैं।

दूसरी स्थिति यह भी है कि अधिकारी लापरवाह न हो और उन्हें दबाब में कार्य करना पड़ रहा है।

 स्थितियाँ जो भी रही हों वह तो जांच के बाद सामने आयेगा । लेकिन इस मामले में सरकार का अगला कदम क्या होगा । मीडिया से लेकर तमाम प्रदेश के लोगों की निगाहें इस पर हैं।

मसूरी में सर जार्ज एवरेस्ट की 142 एकड़ जमीन को पर्यटन विकास परिषद ने पिछले साल लीज पर दिया था। यह लीज का किराया प्रति वर्ष के हिसाब से एक करोड़ रुपया सरकारी खाते में जमा होना है। अब घपला इसी बात पर है कि मसूरी जैसे स्थान में इस बेशकीमती जमीन को इतने सस्ते में कैसे दिया गया है ? इस घपले में बाबा रामदेव के सहयोगी और प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य बाल कृष्ण का नाम सामने आया है। वह इस तरह कि सरकार ने जब इस स्टेट को लीज पर देना का नोटिफिकेशन (विज्ञप्ति ) जारी की तो  केवल तीन कंपनियों ने ही टेंडर भरा । आरोप है कि इन तीनों कम्पनियों के अधिकांश शेयर रामदेव के सहयोगी बालकृष्ण के पास हैं। अर्थात यह तीनों कम्पनियों का रिमोट एक ही व्यक्ति के पास है ।

वैसे बताते हैं कि मामला यह पिछले साल का है और उस समय कांग्रेस के पूर्व विधायक मनोज रावत ने इस अनियमितता / घपले का भण्डाफोड़ कर दिया था।

आरोप है कि सर जार्ज एवरेस्ट की उक्त इस्टेट को लीज पर लेने हेतु जो तीन कम्पनियां सामने आयी उनमें राजा एयरोस्पोर्ट्स, प्रकृति ऑर्गनिक्स और भरुवा एग्री साइंस शामिल हैं। इनमें राजा एयरो स्पोर्टस के नाम यह टेण्डर महज एक करोड़ रुपये प्रति वर्ष की दर से खोला गया । इन तीनों कम्पनियों के बड़े शेयरहोल्डर बालकृष्ण हैं । आरोप है कि इस टेण्डर में आपसी मिलीभगत / सांठगांठ के चलते इतने बडे इस्टेट की लीज हेतु प्रतिवर्ष इतनी कम दर प्राप्त हुई। सवाल यह भी है कि तीन ही टेण्डर क्यों आये दो या चार भी हो सकते थे। मतलब औपचारिकता पूरी तो करनी ही थी। 

 इस बात पर हैरानी जरूर है कि जिस जमीन का बाजार मूल्य 30 हजार करोड़ रुपये आंका जा रहा हो उसे पर्यटन विभाग ने 1करोड़ रु० वार्षिक लीज पर उक्त कंपनी को सौंप दिया ।  मतलब 142 एकड़ भूमि (762 बीघा या 2862 नाली या 5744566 वर्ग मीटर) को पर्यटन विकास परिषद के उप कार्यकारी अधिकारी ने ‘‘राजा एरो स्पोर्ट्स एंड एडवेंचर प्राइवेट लिमिटेड’’ को केवल 1 करोड़ रुपये वार्षिक किराए पर दे दिया।

जमीन लीज पर देना और उससे आय प्राप्त करना बेशक सरकार का अधिकार है लेकिन सरकार के नाक के नीचे जहां एक बाबू से लेकर तमाम आई . ए एस और मन्त्री तक बैठे हैं, उनको इस बात की भनक तक नहीं लगी कि टेन्डर में पारदर्शिता का अभाव है। या फिर किसी दबाब के कारण इन सबके हाथ बंधे रहे। अब जब यह मामला पुनः गर्मा गया है तो भाकपा (माले) के प्रदेश सचिव इन्द्रेश मैखुरी और कांग्रेस के नेता प्रतियक्ष यशपाल आर्य मुखर होकर टेण्डर निरस्त करने, मामले की निष्पक्ष जांच करने और  जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कारवाई करने की मांग कर रहे हैं।

 कौन हैं जार्ज एवरेस्ट ?

आपने दुनिया की सबसे ऊँची चोटी माउन्ट एवरेस्ट का नाम तो सुना होगा । माउन्ट एवरेस्ट का नामकरण उन्हीं के नाम से है। जार्ज एवरेस्ट का जन्म चार जुलाई 1790 को क्रिकवेल (यूनाइटेड किंगडम) में पीटर एवरेस्ट और एलिजाबेथ एवरेस्ट के घर हुआ था। विलियम ट्रिस्ट्राम एवरेस्ट के छह बच्चों में सबसे बड़े बेटे और तीसरे थे।

जार्ज एवरेस्ट ने जीवन का लंबा अर्सा पहाड़ों की रानी मसूरी में गुजारा था।

जार्ज एवरेस्ट

 देश की प्रधान मानचित्रण और सर्वेक्षण एजेंसी भारतीय सर्वेक्षण विभाग (सर्वे आफ इंडिया) की नींव ब्रिटिश फौज में लेफ्टिनेंट कर्नल जार्ज एवरेस्ट ने ही रखी थी। उन्होंने वर्ष 1832 में मसूरी स्थित हाथीपांव के पार्क एस्टेट क्षेत्र में इसकी स्थापना की थी। तब इसे रायल ग्रेट टिग्नोमेंट्रिकल सर्वे आफ इंडिया के नाम से जाना जाता था।

कालांतर में सर्वे आफ इंडिया का मुख्यालय देहरादून स्थानांतरित हो गया। इस संस्थान के पहले सर्वेयर जनरल होने का गौरव भी जार्ज एवरेस्ट को ही मिला। 

ब्रिटिश सर्वेक्षक एंड्रयू वा की सिफारिश पर वर्ष 1865 में दुनिया के सबसे ऊँचे इस शिखर का नामकरण उनके नाम पर हुआ। इससे पहले इस चोटी को ‘पीक-15’ नाम से जाना जाता था। जबकि, तिब्बती लोग इसे ‘चोमोलुंग्मा’ और नेपाली ‘सागरमाथा’ कहते थे। मसूरी स्थित सर जार्ज एवरेस्ट के घर और प्रयोगशाला में वर्ष 1832 से 1843 के बीच भारत की कई ऊंची चोटियों की खोज हुई और उन्हें मानचित्र पर उकेरा गया। जार्ज वर्ष 1830 से 1843 तक भारत के सर्वेयर जनरल रहे। उन्होंने चोटियों की खोज करने और ऊंचाई नापने में जिन यंत्रों का प्रयोग किया, वह आज भी सर्वे आफ इंडिया के मुख्यालय में सुरक्षित हैं।

=बिमल नेगी

दिनांक : 13 सितम्बर, 2025

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