राजनीति

माछी पकड़, माछी पकड़, माछी पकड़, डौंको…

अफवाहें हैं, या सचमुच इस बार प्रदेश मन्त्रिमंडल का विस्तार होगा ?

प्रदेश विधानसभा भवन देहरादून, उत्तराखण्ड ।

पौड़ी। माछी पकड़, माछी पकड़, माछी पकड़ डौंको – क्य भरोसो कन इन फुण्ड दुलीं मौको । बचपन में बच्चों के बीच यह  लोकप्रिय खेल था माछी पकड़ । इसमें हम साथी को तरजनी (इन्डेक्स फिंगर ) उंगली हिलाते हुए इसे मछली मानते हुए पकड़ने को कहते थे लेकिन जैसे ही साथी पकड़ने को होता था उसे अंगूठा (चुसण्यां) थमा देते थे।

बस, यही हाल पिछले लगभग साढ़े तीन सालों से प्रदेश सरकार का मन्त्रिमंडल विस्तार का भी है। यहाँ भी माछी पकड़ का खेल होता दिखाई देता है। लाचार विधायक, इन्हें न तो निगलते बनता है और न थूकते । इधर, इन साढ़े तीन सालों में कितनी बार उन्हें दिल्ली दरबार तक दौड़ लगानी पड़ी है। आखिर इनकी पीड़ा समझने वाला कोई तो हो । मन्त्री किसे बनाया जाना है अब चूंकि इसमें असमंजस की स्थिति है, इसलिये वो अपनी बात खुलकर भी जुवान पर नहीं ला पा रहे हैं और ना ही अपनी पीड़ा सार्वजनिक कर पा रहे हैं। उनकी स्थिति कुछ ऐसी है कि ‘जो समझ रहे, वो नहीं समझ रहे / पर जो समझ रहे, वो न जाने क्या समझ रहे। 

आपको बताते चलें कि वर्तमान में प्रदेश मन्त्रिमंडल में पांच पद रिक्त चल रहे हैं। मुख्यमंत्री धामी ने मार्च 2022 में जब शपथ ली थी, तब मंत्रिमंडल में तीन पद रिक्त रखे गए थे। बाद में कैबिनेट मंत्री चंदन रामदास के निधन के कारण एक और मंत्री पद रिक्त हो गया।

इसके अलावा इसी वर्ष पहाड़वासियों को अपशब्द कहने के बाद मचे विवाद से कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल से मजबूरन इस्तीफा दिलाया गया था। इस प्रकार रिक्त मंत्री पदों की संख्या बढ़कर पांच हो गई। अब इन पांच पदों पर किसके भाग खुलेंगे, इसके लिये फिलहाल सरकार ने कयास लगाने की खुली छूट दी है। आप अपने मनपसन्द विधायक को फिलहाल चर्चाओं में ला सकते हैं।

पिछले लगभग तीन सालों से मुख्यमंत्री अनुमन जब भी दिल्ली दौरे पर जाते हैं,  मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं तेज हो जाती हैं। इस बार भी ऐसे ही हुआ कुछ दिनों पहले मुख्यमन्त्री दिल्ली गये तो पिछले दो हफ्तों से मन्त्रीमंडल विस्तार की चर्चाएं गरम हैं। कई विधायक दिल्ली दरबार की दौड़ लगा चुके हैं और इधर देहरादून में भी मुख्यमन्त्री और पार्टी के प्रभावशाली नेताओं / पदाधिकारियों से मुलाकातौं ने जोर पकड़ा है। अब चर्चा हर बार की तरह इस समय भी यही है कि पितृपक्ष समाप्त होते ही शुभ घड़ी में विस्तार किया जायेगा ।

अब पिछले तीन सालों से तो यह शुभ घड़ी आते आते रह जाती है। मानों मन्त्रिमंडल का विस्तार न हुआ किसी मकान / दुकान / कारखाने का उद्घाटन हो गया। अब जिन्होंने शुभ घड़ी / मुहूर्त में शपथ ली थी उन्होंन क्या फरका दिया । इनमें एक को तो बेअदबी से रुखसत होना पड़ा । अरे भाई, सवाल उत्तराखण्ड के विकास का है । अब साढ़े तीन साल आपने लगभग आधे अधूरे मन्त्रिमंडल के साथ निकाल दिये तो डेढ़ साल में कितना उलट पुलट हो जायेगा । खैर, इसे माननीय मुख्यमन्त्री जी का विशेष अधिकार बताया जा रहा है तो वे जाने । पर जब विशेषाधिकार है तो दिल्ली की तरफ नहीं देखा जाना चाहिए। फटक से उत्तराखण्ड के हित में इसका उपयोग हो जाना चाहिए मान्यवर ।

अब बोलने वालों का मुँह किसी ने सिला थोड़ी है। विपक्ष बोल रहा है। पब्लिक बोल रही है। मीडिया बोल रहा है। इविन कि स्वयं प्रदेश अध्यक्ष और मा० मुख्यमन्त्री जी संकेत दे रहे हैं जल्दी होगा । तो होगा भई । इस बार तो हो ही जायेगा । बोल तो यह भी रहे हैं कि कुर्सी से बगावत रोकने के लिये इन पदो को खाली रखा जा रहा है। ऐसा देखा भी जा रहा है कि जैसे ही सत्ता की चूल जरा सि हिलती दिखाई देती है तो विस्तार की खबरें मीडिया में तैरने लगती हैं।

अब मुख्यमन्त्री बदले जाने की अफवाह पर जब मुकदमा दर्ज हो सकता है तो इस तरह बार -बार बे -सिर पैर की बातों से पब्लिक को बेबकूफ बनाने वालों और बिना प्रमाणों के विस्तार की अफवाह उड़ाने वालों के खिलाफ भी कुछ तो होना चाहिए बल । पब्लिक का भी इन अफवाहों को सुन सुनकर टैम खराब हो रहा है बल ।

परन्तु हमारी सरकार को निश्चित रूप से हमारे इन वर्तमान मन्त्रियों के कामकाज के बोझ के बारे में जरूर सोचना चाहिए । पांच से लेकर आठ – दस मन्त्रालय एक मंत्री के पास । सारा वक्त तो फाइलें निपटाने पर लग रहा है। सिलान्यास, उद्घाटन लोकार्यण अलग । आपदा में भागदौड अलग । अब मा० मुख्यमन्त्री को ही देखे ढेरों मन्त्रालयों को संभाले हैं। इसलिये अब बहुत हो गया। अब कि बार सात के पार… बस कर ही दीजिए महाराज.. ।

= बिमल नेगी

 

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