जिला पंचायत पौड़ी : पिछले कार्यकाल में हुए घोटाले दर घोटाले
नवगठित जिला पंचायत के सामने साख पुनर्बहाली की चुनौती

जिला पंचायत पौड़ी के पिछले कार्यकाल में हुए वित्तीय घपले – घोटालों की चर्चाएं थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। एक घोटाले की आंच थोड़ी धीमी होती है तब तक दूसरे बड़े घोटाले का पर्दाफाश हो जाता है। लेकिन इस बार के उजागर हुए घोटाले इसलिये अधिक चर्चाओं में आये हैं क्यों कि इनमें असम्भव को सम्भव होना दिखाया गया है और मीडिया अगर सही है तो इसके प्रमाण भी स्वयं जिला पंचायत ही उपलब्ध करा रही है।
जिला पंचायत का पिछला कार्यकाल भी इस बार की तरह सत्तारूढ़ दल के बहुमत में था । तो क्या इसलिये यहाँ घोटालेबाजों के हौसले इतने बुलन्द हो गये कि ये ‘कुछ भी’ करते गये? धीरे – धीरे यहाँ जिला पंचायत की छवि कतिपय घोटालेबाजों के अड्डे के रूप में सामने आती चली गयी। जांच पर जांचे होती गयी पर इन घोटालेबाजों का कोई कुछ नहीं उखाड़ पाया । इसका परिणाम यह हुआ कि यहाँ ईमानदार कार्मिको को भी सन्देह की दृष्टि से देखा जाने लगा। हम यह नहीं कहते कि किसी मंत्री या उसके पैरोकारों की आड़ पर इनकी हिम्मत बंधी और माना बंधी पर इन्हें इतना तो पता ही था कि फंसने के बाद कोई बचाने नहीं आता ।
जब तक जिला पंचायत का पिछला कार्यकाल रहा इनके जांच में दोषी पाये जाने पर इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पायी लेकिन कार्यकाल खत्म होते ही इन पर गाज गिरनी शुरू हो गयी। वह भी तब जब इनका पूरा कच्चा चिट्ठा सामने नहीं आया था । अब जैसे मीडिया में वाइरल सूचना के अधिकार से मिली जानकारी में दावा किया जा रहा है कि जिला पंचायत के दस्तावेज स्वयं ही घोटालों का पर्दाफाश कर रहे हैं और सूचना के अधिकार से सीमित जानकारी मिली है। तो क्या सरकार या वर्तमान जिला पंचायत को नहीं लगता कि जिला पंचायत के पिछले कार्यकाल में हुई वित्तीय गड़बड़ियों /घोटालों / अनियमिताओं की एक समग्र व्यापक और निष्पक्ष जांच होती चाहिए।
अच्छा होता कि वर्तमान जिला पंचायत की पहली बैठक में ही इस व्यापक जांच का प्रस्ताव पारित हो जाता । माना उस समय तक ये नये खुलासे सामने नहीं आये थे परन्तु अब जब ये घोटाले चर्चाओं में आ गये हैं तो क्या जिला पंचायत को इन घोटालों की जांच नहीं करनी चाहिए । अच्छा हो यदि वर्तमान जिला पंचायत अपने स्तर पर तो जांच कराये ही साथ ही एक व्यापक व निष्पक्ष जांच की अनुशंसा सरकार से भी करे । वर्तमान जिला पंचायत की बैठक की करवाई से यह बात सामने आयी कि इस कार्यकाल मे भी सभी ईमानदारी से बेहतर कार्य करने की मंसा रखते हैं । तो क्या जिला पंचायत की गिरी साख को उबारने के लिये उन्हें दोषियों को सजा दिलाने की पहल नहीं करनी चाहिए ?
घोटालेबाजी का यह मुद्दा तो प्रदेश सरकार की उस साख से भी जुड़ा है जिसमें वह जीरो टॉलरेंस की बात करती है । जब घोटाला मुँह बाये खड़ा हो तो सरकार को तो स्वयं ही संज्ञान लेकर इसकी निष्पक्ष जांच करानी चाहिए । अन्यथा लोग तो यही कहेंगे कि सरकार ही दोषियों को बचाने के लिये उनके अन्य घोटालों को दबाये रखने के लिये चुप बैठी है। मीडिया की बात पर यकीन न करने की बात कही जाती है इसलिये यदि गलत आरोप लगा कर कुछ लोगों को फंसाया जा रहा है तो यह बात भी तो जांच में सामने आनी चाहिए ।
ज्ञात हो कि सोशल मीडिया पर एक चैनल पर पिछले कुछ दिन से वाइरल समाचार में दावा किया गया है कि सूचना के अधिकार के तहत मांगी गयी जानकारी में जिला पंचायत पौड़ी के निलम्बित अपर मुख्य अधिकारी डॉ० सुनील कुमार का निजी वाहन एक दिन में एक लाख का डीजल / पेट्रोल पी गया। अब एक दिन में एक लाख का तेल पीने वाला वाहन । अगर वाहन का माइलेज मात्र एक किमी० भी है और प्रति ली० तेल सौ रुपये भी है तब भी एक हजार किमी० प्रति दिन वाहन का चलना असम्भव है। इस असम्भव कार्य को सम्भव कर दिखाया जिला पंचायत के निलम्बित एएमए डॉ० सुनील कुमार ने । टेण्डर प्रक्रिया में पारदर्शिता न होने के आरोप तो जिला पंचायत के पिछले कार्यकाल में पहले ही लग रहे थे लेकिन अनुबन्ध पहले होना और टेण्डर बाद में खुलने के आरोप अब सूचना के अधिकार से प्राप्त जानकारी सामने आने पर सही प्रतीत होते हैं। यही नहीं पिछली जिला पंचायत अध्यक्ष शान्ति देवी का ब्यूटी पार्लर का बिल यदि वाकई जिला पंचायत के खातों में वाकायदा दर्ज हैं (जैसा कि सूचना के अधिकार से जानकारी मिलने की बात सामने आयी है) तो इससे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण अनहोनी और क्या हो सकती है? माना कि शान्ति देवी को जानकारी नहीं थी लेकिन अन्य लोग तो अनुभवी और विभागीय कार्य में घिसे पिटे थे । तब यह क्यों न मान लिया जाय कि जो कुछ हुआ आपसी मिलीभगत से हुआ ।
जिला पंचायत पौडी का पिछला कार्यकाल पिछले कुछ सालो से मीडिया की सुर्खियों में है। तत्कालिक कतिपय सदस्यों ने उस समय घपलों की जांच की मांग को लेकर धरना भी दिया लेकिन उस समय इनकी भी एक न चल पायी । अब जब सरकार ने घपले घोटालों के खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला शुरू कर दिया तो सरकार और वर्तमान जिला पंचायत को चाहिए की इनकी निष्पक्ष जांच कर घोटालों की तह में जाय ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके । तभी जिला पंचायत की खोई साख की पुनर्बहाली हो सकती है।
= बिमल नेगी



