रोज सपने देख, लेकिन इस कदर प्यारे न देख
प्रशासन ने की पौड़ी में चार साल बाद पुनः हेरिटेज स्ट्रीट बनाये जाने की पहल

दिनांक : 27 अगस्त, 2025
पौड़ी । दिल को बहला ले, इजाजत है, मगर इतना न उड़। रोज सपने देख, लेकिन इस कदर प्यारे न देख । ।
दुष्यन्त कुमार का यह शेर शायद ऐसे ही सपने दिखाने और देखने वालों के लिये रहा होगा । जी हाँ, पौडी के सन्दर्भ में यह बिल्कुल सटीक लगता है जहाँ सरकारी नेता और अधिकारी सपना दिखाते हैं, फाइले खुलती हैं और फिर सपने दिखाने वाले न जाने कहाँ गुम हो जाते हैं। यहां रह जाते हैं सपने देखने वाले । बेचारे, जाये भी तो कहाँ ? जाने वाले तो चले गये, अब जो हैं वे सपने देखते रहें। उत्तराखण्ड आंदोलन के समय भी देखे थे और आज तक सपने देखते हुए ही जी रहे हैं ।
अब एक बार प्रशासन पुनः हम नगर वासियों को ऐसा सपना दिखाने लगा है जिसे देखे हुए हमें चार – पांच साल हो गये । हम यहाँ सपने दिखाने के पीछे प्रशासन या अधिकारियों की मंसा पर सवाल खड़े नहीं कर रहे हैं । बस, नेताओं से इतना कहना चाहते हैं कि भई सपने दिखाने हैं तो सत्ता आपके हाथ में है, इन्हें हकीकत में बदलने का माद्दा भी आपके पास होना चाहिए ।
पौडी के तत्कालीन डी० एम० सहाब धीरज गर्ब्याल ने तत्कालीन मुख्यमन्त्री त्रिवेन्द्र रावत के निर्देशन में खुबसूरत पौड़ी के लिये एक सपना दिखाया था। सपना ऐसे पौड़ी का था जिसे हेरिटेज शहर के रूप में विकसित करना था । पौड़ी के अपर बाजार, धारा रोड, मॉल रोड और बाजारों को एक हेरिटेज स्ट्रीट के रूप में विकसित किया जाता था । इसके लिए ब्लूप्रिंट भी तैयार कर लिया गया था । वहीं, मुख्य स्टेशन से अपर बाजार जाने वाले मार्ग की सभी दुकानों को फसाड (Facade) लाइटिंग से सजाया जाना था । इसे पहाड़ी शैली से बनाया जाना था ताकि शहर सुंदर और आकर्षित लगे ।
हमें तब बताया गया था कि पौड़ी उत्तराखंड का पहला ऐसा शहर होगा जो हेरिटेज शहर के रूप में विकसित होगा। इसके बाद यहां पर पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी और यह पर्यटन मानचित्र में अपना स्थान बनाने में कामयाब होगा । हेरिटेज स्ट्रीट पूरे इण्डिया में एक अलग ही स्ट्रीट के रूप में देखने को मिलेगी। उस समय हमे बताया गया था कि यह प्रथम चरण में 05 करोड़ की योजना है, इसके लिये जिला योजना से लगभग दो करोड़ जारी किया गया है। उस समय तत्कालीन डी०एम० श्री गर्ब्याल ने कहा था कि इस पर शीघ्र ही कार्य भी शुरू हो जायेगा। उस समय पुरानी जेल को भी म्यूजियम व हाट बाजार के रूप में पुराने आर्किटेक्ट को ध्यान में रखते हुए विकसित करने की योजना बनाई गई थी। उन्होंने कहा था कि नये कलेक्ट्रेट भवन में वाहन पार्किंग, लोगों के बैठने के लिए गार्डन बनाने की कार्य योजना/डिजाईन तैयार की गयी है। वहीं पुराने कलेक्ट्रेट भवन को रिस्टोर करने की योजना है, वह भी एक हेरिटेज बिल्डिंग होगी। अब यह कलक्ट्रेट का पुराना भवन तो हैरिटेज भवन के रूप में लगभग बन कर तैयार हो गया । कण्डोलिया थीम पार्क भी बना लेकिन अन्य कोई भी कार्य धरातल पर नहीं उतर पाया ।
उन्होंने उस समय कहा था कि विभिन्न चरणो में होने वाले इस कार्य के अन्तिम चरण में धारा रोड़ को भी अपर बाजार की तर्ज पर हेरिटेज रोड़ के रूप में विकसित करने की योजना है। शहर को अलग पहचान दिलाने के लिए जितनी भी रोड़ हैं, उनमें अलग-अलग रूप में विकसित किया जायेगा, जैसे कि टेका रोड़ को चैरी ब्लासम लेन के रूप में, देवप्रयाग रोड़ को के इसी रूप में विकसित किया जाना है। उन्होंने कलेक्ट्रेट भवन में 40 छोटे वाहन पार्किंग, सिटिंग पार्किंग एवं फूड पार्किंग आदि नये-नये कार्य किये जाने की प्लानिंग होने की बात भी कही थी। जि
तत्कालीन सीएम त्रिवेन्द्र रावत ने कण्डोलिया थीम पार्क मे इन कार्यों की घोषणा और उद्घाटन भी किया था। परन्तु इसके कुछ समय बाद ही बल न रहा बांस और न बजी बांसुरी । सी० एम० बदल गये और डी० एम० सहाब तबादले में चले गये। रह गये पौड़ी में सपना देखने वाले । लगभग तीन साल तक डॉ० चौहान डी० एम० रहे लेकिन इन बातों पर कभी किसी ने चर्चा नहीं की। अब यह अच्छी बात है कि वर्तमान प्रशासन पुनः इसमें रुचि ले रहा है। कल अपर जिलाधिकारी अनिल गर्ब्याल ने इस सम्बन्ध मे बैठक कर पौड़ी वासियों के सपनों को पंख लगाये हैं। देखते हैं कि आने वाले दिनों में पौड़ी के विकास का यह सपना क्या करवट लेता है।
= बिमल नेगी



