बाहरी वाहनों पर ‘ग्रीन सेस’ से खजाना भरेगी सरकार
उत्तराखण्ड आने वाले पर्यटक वाहनों को दिसम्बर 2025 से करनी पड़ेगी जेब ढीली

देहरादून । राज्य गठन के 25 वर्ष पूर्ण होने पर राज्य सरकार ने दिसंबर से बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों से ग्रीन सेस वसूलने की घोषणा की है। एक बार उत्तराखंड में प्रवेश के लिए दिया गया ग्रीन सेस एक दिन के लिए प्रभावी होगा। इससे प्रतिवर्ष सरकार को 100 करोड़ की कमाई होने का अनुमान है।
उत्तराखंड परिवहन विभाग ने प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। दिसंबर 2025 से राज्य में प्रवेश करने वाले बाहरी राज्यों के वाहनों से ग्रीन टैक्स वसूला जाएगा। मुख्यमन्त्री पुष्कर सिह धामी ने इसकी घोषणा की है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इस निर्णय का उद्देश्य राज्य में स्वच्छता, पर्यावरण संतुलन और प्रदूषण नियंत्रण को मजबूत बनाना है। टैक्स वसूली की प्रक्रिया दिसंबर के पहले सप्ताह से शुरू की जाएगी।
क्या होता है ग्रीन सेस –
ग्रीन सेस (Green Cess) एक प्रकार का पर्यावरणीय उपकर है, जिसे प्रदूषण नियंत्रण और हरित विकास के उद्देश्य से वसूला जाता है। उत्तराखंड सरकार ने इसे दिसंबर 2025 से लागू करने की घोषणा की है, खासकर उन वाहनों पर जो अन्य राज्यों से राज्य में प्रवेश करते हैं।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि देहरादून में वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत सड़क की धूल 55 फीसदी है, जबकि वाहन उत्सर्जन सात फीसदी भी एक प्रमुख कारण है। उन्होंने बताया कि ग्रीन सेस से सड़क धूल नियंत्रण और स्वच्छ वाहन नीति अपनाना शहर की वायु गुणवत्ता सुधारने का सबसे प्रभावी कदम होगा।
कैसे होगी ग्रीन टैक्स वसूली
मिली जानकारी के अनुसार,राज्य की सीमाओं पर लगाए गए ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे बाहरी वाहनों के पंजीकरण नंबर को स्कैन करेंगे।
वर्तमान में सीमावर्ती इलाकों में 16 कैमरे लगाए गए हैं, जिन्हें अब बढ़ाकर 37 किया जा रहा है। इन कैमरों से प्राप्त डेटा सीधे सॉफ्टवेयर के माध्यम से विक्रेता कंपनी को भेजा जाएगा।
इसके बाद कंपनी डेटा को भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) के डेटाबेस से लिंक करेगी। वहां से वाहन मालिकों के वॉलेट नंबर की पहचान की जाएगी और तय की गई टैक्स राशि स्वतः उनके खाते से कटकर परिवहन विभाग के खाते में जमा हो जाएगी।
तय की गई टैक्स दरें
वाहन के प्रकार और वजन के आधार पर ग्रीन टैक्स दरें अलग-अलग रखी गई हैं—
छोटे वाहन – ₹80
छोटे मालवाहक वाहन – ₹250
बसें – ₹140
ट्रक – ₹120 से ₹700 तक (वजन के अनुसार)
इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन, सोलर व बैटरी चलित वाहनों पर सेस नहीं। द्विपहिया, तिपहिया वाहनों पर भी सेस नहीं।
उद्देश्य और असर
परिवहन विभाग के अनुसार, यह कदम न केवल राज्य की पर्यावरणीय स्थिति में सुधार करेगा बल्कि बाहरी वाहनों की बेहतर निगरानी में भी मददगार साबित होगा। इससे राज्य में आने वाले पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर अंकुश लगेगा।
इस योजना को लागू करने के लिए विभाग ने एक विक्रेता कंपनी को अनुबंधित किया है जो पूरे टैक्स वसूली सिस्टम को डिजिटल रूप से संचालित करेगी।
दिनांक 27 अक्टूवर, 2025



