लोक भाषा

दिल्ली विश्वविद्यालय में गढ़वाली भाषा सहित बहुभाषिक अनुवाद कार्यशाला  

गढ़वाली-कुमाउनी भाषाओं में भी अव्वैयार की ‘आथीसूड़ी’ का अनुवाद  

नई दिल्ली । 06 दिसम्बर, 2025

दिल्ली विश्वविद्यालय के भारतीय भाषा तथा साहित्य अध्ययन विभाग (Indian Languages and Literary Studies) द्वारा केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान ( Central Institute of Classical Tamil (CICT) के सहयोग से तीन दिवसीय अनुवाद कार्यशाला का आयोजन किया गया ।

4 दिसम्बर, 2025 से शुरू हुयी इस  काार्यशाला में मुख्य रूप से गढ़वाली, सिंधी, कश्मीरी, बोडो, मैथिली, मेइती—के साथ–साथ अंतरराष्ट्रीय भाषाओं जैसे पोलिश, वियतनामी, स्पैनिश, पुर्तगाली आदि के प्रतिभागी अनुवादकों/ विद्वानों ने भाग लिया। इस तीन दिवसीय कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य तमिल की प्रसिद्ध रचना अव्वैयार की ‘आथीसूड़ी’ का अनुवाद भारतीय तथा विदेशी भाषाओं में करना है, जिससे भाषाई विविधता और अंतर–संस्कृतिक संवाद को प्रोत्साहन मिल सके।

इस कार्यशाला का उद्घाटन श्री अनूप लाथर, चेयरपर्सन, कल्चर काउंसिल एवं PRO, दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा किया जाएगा। कार्यक्रम में प्रो. रवीन्द्र कुमार डीन, कल्चर काउंसिल और डायरेक्टर, दिल्ली विश्वविद्यालय (Dean, Culture Council & Director CIPS, DU) तथा प्रो. भार्तेन्दु पांडेय प्रमुख संस्कृत विभाग (Head, Department of Sanskrit, DU) विशेष रूप से उपस्थित रहे।

प्रोफ़ेसर डी. उमा देवी, तमिल की प्रोफ़ेसर, विभाग — भारतीय भाषाएँ एवं साहित्य अध्ययन, दिल्ली विश्वविद्यालय, ने पूरे कार्यक्रम का संयोजन एवं सफल संचालन किया। वे इस आयोजन की मुख्य संयोजक रही हैं।

साथ ही, इस कार्य में अकादमिक सलाहकार डॉ. शिवचंदर जी, असिस्टेंट प्रोफ़ेसर, विभाग — कॉमर्स, आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज, का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन रहा।

कार्यशाला आयोजन समिति के सदस्य थे:

• सुश्री सुरभि गुप्ता (रिसर्च स्कॉलर)                         

• सुश्री सेल्वंबल वी (रिसर्च स्कॉलर                         

• श्रीमती रजनी गुप्ता (रिसर्च स्कॉलर)                     

• श्री सतीश आर (रिसर्च स्कॉलर                             

• सुश्री प्रभजोत कौर (रिसर्च स्कॉलर)

 • श्री शुभम चौधरी (रिसर्च स्कॉलर)

 • श्री आकाश (रिसर्च स्कॉलर)

 • श्री एस. श्री सरन (रिसर्च स्कॉलर)

इस अनुवाद कार्यशाला में भारत की विभिन्न भाषाओं—जैसे गढ़वाली, सिंधी, कश्मीरी, बोडो, मैथिली, मेइती—के साथ–साथ अंतरराष्ट्रीय भाषाओं जैसे पोलिश, वियतनामी, स्पैनिश, पुर्तगाली आदि के प्रतिभागियों द्वारा तमिल की प्रसिद्ध रचना अव्वैयार की ‘आथीसूड़ी’ का अनुवाद भारतीय तथा विदेशी भाषाओं में किया गया । 

गढ़वाली भाषा में उक्त पुस्तक का अनुवाद साहित्यकार श्री दिनेश ध्यानी ने किया है, जिसमें डॉ. रुचि राणा ने उनका सहयोग किया है। इस आयोजन में गढ़वाली भाषा और कुमाउनी भाषा को स्थान मिलना अपने आप में बड़ी बात है। गढ़वाली भाषा के अनुवादक एवं उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली के संयोजक श्री दिनेश ध्यानी अपने सम्बोधन कि गढ़वाली-कुमाउनी भाषायें लगभग एक हजार साल से भी पुरानी भाषायें हैं। मंच लगातार इन भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए प्रयासरत है। श्री ध्यानी ने कहा की हं विगत कई वर्षों से दिल्ली एनसीआर समेत कई राज्यों में बच्चों को गढ़वाली, कुमाउनी भाषा पढ़ा रहे हैं। नई पीढ़ी भाषा, साहित्य व सरोकारों से जोड़े रखना बहुत अहम् है। श्री ध्यानी ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन हमारे जैसे संघर्षशील भाषाओं के लिए सुकून का पल लेकर आते हैं। दिल्ली विश्वविद्यायल जैसे बड़े फलक पर हमारी भाषाओं की बात होना गर्व की बात है। आशा है इस प्रकार के आयोजन लगातार होते रहेंगे।

सभी वक्ताओं ने भी इस बात पर सहमति जताई कि इस प्रकार की कार्यशाला लगातार होनी चाहिए। देश विदेश के भाषा प्रेमी, साहित्यकार व अनुवादकों ने कहा है तीन दिन तक लगातार चिंतन, मनन और बहुत कुछ नया सीखने और जानने का अवसर का सभी ने भाषाहित में बहुत फायदा उठाया।    

यह पहला विविध सांस्कृतिक समुदायों को एक मंच पर जोड़ते हुए साहित्य को वैश्विक विस्तार प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। निदेशक प्रो. आर. चन्द्रशेखरण (CICT, चेन्नई) तथा प्रो. रविप्रकाश टेकचंदानी और प्रो. डी. उमा देवी द्वारा इस आयोजन का नेतृत्व एवं परिकल्पना की गयी।  

यह कार्यशाला इस विश्वास को मजबूत करती है कि जब अनुवादक एक साथ बैठते हैं, तब भाषाएँ दीवारें नहीं, पुल बन जाती हैं, और दुनिया और अधिक एकीकृत दिखाई देती है।

= दिनेश ध्यानी

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