उत्तराखंड

भामादेई मे क्या लेण कै से, सच्ची बुदु मे क्या लेण कै से

तो क्या सचमुच होटल और रिजॉर्ट में स्वेच्छा से बन्धक हैं हमारे प्रतिनिधि ?

पौड़ी। भामादेई मैं क्या लेणू कैसे – सच्ची बुदु मैं क्या लेणू कै से ? वाह भाई जनप्रतिनिधियों ! सच तो है इन्हें किसी से क्या लेना-देना । जिसने भी यह गढ़वाली गीत तथाकथित ऐसे जनप्रतिनिधियों के सन्दर्भ में आम जनता से जोड़कर पिरोया है जो आज तिस्तरीय छोटी सरकारे बनाने के लिये होटलों और रिजॉर्ट में ठहर कर नाचते गाते जीवन का आनन्द ले रहे हैं, उस गीतकार ने इन पंक्तियों में हकीकत ही बयां किया है। हलाँकि जनप्रतिनिधि कह कर वायरल वीडियो में जिन लोगों को जनप्रतिनिधि दिखाया गया है इसकी पुष्टि नहीं हुई है । फिर भी हालात पूरे प्रदेश में कुछ इसी तरह के बताये जा रहे हैं जहाँ लोकतन्त्र पर धनबल अर बाहुबल हावी है।

आगामी 14 अगस्त को प्रदेश में जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लाक प्रमुख का चुनाव होता है। हलाँकि यह चुनाव दलीय आधार पर नहीं होता परन्तु राजनीतिक दलों को अपने जनाधार बढने का अवसर दिखायी देने  के कारण इन चुनावों ने दलीय स्वरूप अख्तियार कर लिया है। ऐसे में ब्लाक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी हथियाने के लिये पूरी जोर अजमाइश के साथ खुला खेल मुरादाबादी चल रहा है। 31 जुलाई को पंचायत चुनावों का रिजल्ट आने के दो – तीन बाद से ही पूरे प्रदेश में  कई जिला पंचायत सदस्यों और कई क्षेत्र पंचायत सदस्यो के भी अपने क्षेत्र में न दिखाई देने की चर्चाएं आम हैं। बताया जा रहा है कि कई सदस्यों के पुराने मोबाइल नम्बर भी स्विच ऑफ दिखा रहे हैं और अब ये मोबाइल न० से ही बात कर रहे हैं जो केवल कुछ पारिवारिक सदस्य व कुछ खास लोगों के पास ही हैं।

पंचायत चुनावों में कुछ अपवादों को छोड़ दें ता शुरू से ही धनबल और बाहुबल हावी रहा है। आम आदमी की पहुँच से विधानसभा चुनाव की तरह पंचायत चुनाव भी दूर होते जा रहे हैं। व्यक्ति धनी हो, जुगाडू हो या फिर सरकार, बड़े नेताओं व किसी पार्टी का उस पर वरद्हस्त हो, वही पंचायत चुनाव लड़ सकता है। जबकि यह बात लोकतान्त्रिक अवधारणा से बिल्कुल उलट है। लोकतंत्र में तो हर किसी को चुनाव लड़ने का अधिकार दिया गया है।

राजनीतिक दल यह दिखाने के लिये कि उनकी जनाधार प्रदेश में बढ़ता जा रहा है, ब्लाक प्रमुख और  जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सियों पर नजरे जमाए हैं। प्रत्यक्ष रूप में तो ये राजनीतिक दल कहीं नहीं हैं और केवल यह घोषित कर रहे हैं कि हमारा फलां कडीडेट को अपना समर्थन है लेकिन पर्दे के पीछे वास्तविक रूप में जीत हार की चौसर में गोटी ये दल और इनके नेता ही फिट कर रहे हैं। हलाँकि अब तो स्थिति यह है कि छिपाते – छिपाते ये दल स्वयं ही उजागर होने में पीछे नहीं हैं।

वैसे राजनीति के कुछ वसूल भी होते हैं और इन वसूलों का ध्यान रखना हरेक राजनीतिक दल का वसूल होता है। इसलिये ब्लाक प्रमुख व जिला पंचायत अध्यक्ष हेतु अमुमन प्रत्याशी ऐसे खोजे जाते हैं जो खरीद – फरोख्त की नौबत आने पर खर्चा कर सके । इतना ही नहीं यदि पार्टी के लिये कुछ अंशदान देने की स्थिति में हो तो और बेहतर । अब ये चुनाव जीतना है तो साम दाम दण्ड भेद की नीति तो अपनानी पड़ेगी और ऐसी स्थिति में हार्स ट्रेडिंग हो तो प्रत्याशी का आर्थिक रूप से  मजबूत होना तो बनता है। त्रिस्तरीय चुनाव में खरीद फरोख्त की बात तो शुरू से चल रही है । निर्विरोध चुनाव जीतने के लिये दूसरे प्रत्याशियों से नाम वापसी का दबाब बनाये जाने की बातें भी खूब चर्चाओं में रही हैं।

पिछले कुछ चुनावों से ही प्रदेश में ब्लाक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव हेतु सदस्यो को विधान सभा में विश्वास मत हासिल करने की ट्रेंड पर स्वेच्छा कहें या डरा धमका के कहें बन्धक बनाये  जाने का चलत बढ़ा है। मंसा यही है कि एक बार जो कब्जे में आ गया वह पाला न बदल सके । स्वाभाविक है कि पाले में आने वाला अपना फायदा देख कर ही पाले में आया होगा । बिना स्वार्थ के आया नहीं होगा । हाँ कुछेक की राजनीतिक  मजबूरियां भी हो सकती हैं। परन्तु होटलों और रिजॉर्ट में इनका समय काटे नहीं कट रहा इसलिये थोड़ा बहुत मौज मस्ती तो बनती है। अब ऐस स्थिति में खा – पी के थोडा बहुत नाच गाना हो गया तो किसी के बाप का क्या जाता है। जनता का काम तो पांच सालो तक करना ही है।

अब ऐसे समय में जब प्रदेश में भंयकर आपदाएं आयी हों। इन प्रतिनिधियां का जनता के बीच से ही गायब होना और मोबाइल भी स्विच ऑफ आना दर्शाता है कि हमने कैसे प्रतिनिधियों का चयन किया है। हलाँकि ऐसे सभी नहीं हैं। लेकिन जो हैं उनका आचरण व प्रतिनिधित्व तो इस आपदा के दरमियान देखा जा रहा है। इन्हें और इनके आकाओं को अपने स्वार्थ सिद्धी की पड़ी है। इनकी ओर से जनता भाड़ में जाये क्या फर्क पड़ता है?

https://youtube.com/shorts/vWjvTSXzKh4?si=uffKEUqPwFoEhjM6

( उक्त लिंक को सलेक्ट कर ओपन करें और देखें वायरल वीडियो – उत्तराखण्ड खबर सार इस वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता । इसे सोशल मीडिया से लिया गया है। )

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