मानवीय गतिविधियों से जलवायु असन्तुलन और वैश्विक तापमान में वृद्धि
जलवायु परिवर्तन एवं हिमालयी पर्यावरण की चुनौतियों पर डॉ. बी.जी.आर. परिसर में अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान आयोजित

पौड़ी। 23 अक्टूबर, 2026
चीन के बीजिंग स्थित सिंघुआ विश्वविद्यालय के पृथ्वी तंत्र विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं प्रसिद्ध जलवायु वैज्ञानिक डॉ. जोनाथन एस. राइट ने कहा है कि मानवीय गतिविधियों के कारण ग्रीनहाउस गैसों की बढ़ती सांद्रता पृथ्वी के प्राकृतिक ऊर्जा संतुलन को प्रभावित कर रही है, जिसके परिणामस्वरूप वैश्विक तापमान में वृद्धि और जलवायु अस्थिरता जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।
डॉ० राइट यहाँ हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के डॉ. बी.जी.आर. परिसर, पौड़ी के भूगोल विभाग द्वारा “परिवर्तित होती जलवायु में ऊर्जा असंतुलन” विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय अतिथि व्याख्यान में बोल रहे थे। कार्यक्रम में लगभग 100 शिक्षक, शोधार्थी एवं स्नातक और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया।
अपने व्याख्यान में डॉ. राइट ने पृथ्वी के ऊर्जा बजट की अवधारणा के माध्यम से जलवायु परिवर्तन एवं वैश्विक तापन के वैज्ञानिक आधारों को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि सूर्य से प्राप्त ऊर्जा पृथ्वी की जलवायु प्रणाली का प्रमुख आधार है तथा वायुमंडल और ग्रीनहाउस गैसें पृथ्वी के तापमान को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हालांकि, मानवीय गतिविधियों के कारण ग्रीनहाउस गैसों की बढ़ती सांद्रता पृथ्वी के प्राकृतिक ऊर्जा संतुलन को प्रभावित कर रही है, जिसके परिणामस्वरूप वैश्विक तापमान में वृद्धि और जलवायु अस्थिरता जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।
व्याख्यान के दौरान उन्होंने ऊर्जा असंतुलन (Energy Imbalance), रेडिएटिव फोर्सिंग (Radiative Forcing) तथा पृथ्वी के विभिन्न तंत्रों के बीच पारस्परिक संबंधों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्तमान में पृथ्वी अंतरिक्ष में वापस उत्सर्जित होने वाली ऊर्जा की तुलना में अधिक ऊर्जा अवशोषित कर रही है। इसका प्रभाव वायुमंडल, महासागरों, हिममंडल तथा स्थलीय पारिस्थितिक तंत्रों पर पड़ रहा है, जिससे मौसम के स्वरूप में परिवर्तन, तापमान में वृद्धि तथा चरम मौसमी घटनाओं की आवृत्ति में बढ़ोतरी हो रही है।
उत्तराखंड एवं हिमालयी क्षेत्र के संदर्भ में व्याख्यान का विशेष महत्व रहा। डॉ. राइट ने हिमालय को विश्व के अत्यंत संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में से एक बताते हुए हिमनदों के सिकुड़ने, वर्षा एवं हिमपात के अनियमित स्वरूप, अतिवृष्टि, बादल फटने, भूस्खलन और आकस्मिक बाढ़ जैसी चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि इन परिवर्तनों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझना जलवायु अनुकूलन, आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए आवश्यक है। उन्होंने सतत विकास की नीतियों के निर्माण में जलवायु विज्ञान के महत्व को भी रेखांकित किया।
कार्यक्रम का आयोजन भूगोल विभाग की अध्यक्ष प्रो. अनीता रुदोला के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अतुल सैनी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस शैक्षणिक व्याख्यान के आयोजन एवं समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम के सह-आयोजक डॉ. अनिल दत्त एवं डॉ. सपना भट्ट रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अतुल सैनी ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सपना भट्ट द्वारा प्रस्तुत किया गया। 
व्याख्यान के अंत में आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों ने जलवायु परिवर्तन, पृथ्वी के ऊर्जा संतुलन तथा हिमालयी पर्यावरण से संबंधित विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञ के साथ संवाद किया। इस सत्र ने प्रतिभागियों को जलवायु विज्ञान के नवीनतम शोध एवं वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियों को समझने का अवसर प्रदान किया।
यह अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान डॉ. बी.जी.आर. परिसर में उच्च शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान तथा पर्यावरणीय जागरूकता को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा। कार्यक्रम से विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को जलवायु परिवर्तन की जटिलताओं को समझने तथा हिमालयी क्षेत्र के पर्यावरण संरक्षण के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने में सहायता मिली।


